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योगी सरकार का ऋण मॉडल: खेती और स्वरोजगार को मिली नई उड़ान

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने बीते चार वर्षों में 50 हजार से अधिक लघु और सीमांत किसानों को 1,000 करोड़ रुपये से अधिक दीर्घकालिक ऋण वितरित किया है। इससे किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ पशुपालन, डेयरी और स्वरोजगार के नए अवसर मिले हैं। यह पहल गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सशक्त कदम है।

Published: 12:55pm, 09 Jun 2025

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य के लघु एवं सीमांत किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक प्रभावी पहल की है। बीते चार वर्षों के दौरान राज्य में 50,000 से अधिक किसानों को 1000 करोड़ रुपये से अधिक का दीर्घकालिक ऋण वितरित किया गया है। यह ऋण किसानों को खेती के साथ-साथ कृषि आधारित स्वरोजगार से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई देने में सहायक बना है।

राज्य सरकार के अनुसार, यह पहल हरित क्रांति के नए अध्याय की शुरुआत है। किसानों को केवल पारंपरिक कृषि तक सीमित न रखकर अब डेयरी, पशुपालन, बागवानी, मशरूम उत्पादन, मुर्गी पालन और प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में भी जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इससे किसानों की आय में बढ़ोतरी के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के अवसर मिल रहे हैं।

योगी सरकार की इस योजना का एक बड़ा लाभ यह भी रहा है कि किसानों को सूदखोरों और साहूकारों के चंगुल से मुक्ति मिली है। अब किसान संस्थागत बैंकिंग प्रणाली पर भरोसा जताकर सुरक्षित और पारदर्शी वित्तीय सेवा का लाभ ले रहे हैं।

मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के अंतर्गत चलाई जा रही इस पहल में जहां व्यावसायिक बैंकों की पहुंच सीमित थी, वहां उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक ने अहम भूमिका निभाई है। यह बैंक दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में दीर्घकालिक ऋण पहुंचाकर किसानों को तकनीकी, पूंजीगत और नवाचार के साधन मुहैया करा रहा है।

राज्य सरकार का कहना है कि इन योजनाओं के चलते गांवों में नवाचार, पूंजी निर्माण और स्वरोजगार की नई लहर शुरू हुई है। इससे गांव न केवल आत्मनिर्भर हो रहे हैं, बल्कि कृषि क्षेत्र को भी आधुनिक और व्यावसायिक दिशा मिल रही है।

YuvaSahakar Desk