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वित्त वर्ष 2026-27 में तेजी से बढ़ेगी भारत की अर्थव्यवस्था, मॉर्गन स्टेनली ने अपग्रेड किया इकोनॉमिक आउटलुक

मॉर्गन स्टेनली ने भारत की आर्थिक विकास दर को लेकर अपने पूर्वानुमान को बढ़ाया है। फर्म ने वित्त वर्ष 2026 और 2027 के लिए ग्रोथ रेट को क्रमश: 6.2% और 6.5% बताया है। रिपोर्ट में घरेलू मांग, महंगाई नियंत्रण और सरकारी खर्च को विकास के प्रमुख कारक बताया गया है।

Published: 09:00am, 25 May 2025

ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विस कंपनी मॉर्गन स्टेनली (Morgan Stanley) ने भारत की अर्थव्यवस्था (Indian Economy) को लेकर सकारात्मक रुख अपनाते हुए वित्त वर्ष 2026 और 2027 के लिए जीडीपी ग्रोथ (Indian Economy Growth Forecast) अनुमान को संशोधित कर बेहतर किया है। फर्म ने कहा है कि देश की मजबूत घरेलू मांग, सरकारी पूंजीगत व्यय और नियंत्रण में रह रही महंगाई दर (Inflation Rate) के चलते आर्थिक विकास दर (India GDP growth) पहले के अनुमानों से अधिक हो सकती है।

मॉर्गन स्टेनली ने वित्त वर्ष 2026 के लिए भारत की विकास दर का अनुमान 6.1 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.2 प्रतिशत कर दिया है, जबकि वित्त वर्ष 2027 के लिए इसे 6.3 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत कर दिया गया है। फर्म ने यह भी कहा कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था स्थिर बनी हुई है और इसमें सुधार के संकेत लगातार मिल रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, शहरी मांग में सुधार और ग्रामीण मांग में स्थायित्व की स्थिति बनी हुई है, जिससे उपभोग में तेजी आ सकती है। इसके साथ ही सरकार की सक्रिय नीतियों, खासकर पूंजीगत खर्च को प्राथमिकता दिए जाने से विकास दर को बल मिलेगा। फर्म का यह भी मानना है कि नरम मौद्रिक नीति का रुख बना रह सकता है, जिससे उद्योगों को पूंजी तक बेहतर पहुंच मिलेगी और निवेश का वातावरण सशक्त होगा।

मॉर्गन स्टेनली ने यह भी कहा है कि महंगाई दर आगामी महीनों में नियंत्रण में रह सकती है। रिपोर्ट में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2026 में औसत महंगाई दर 4 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2027 में 4.1 प्रतिशत रह सकती है। यदि मानसून सामान्य रहता है, तो खाद्य मुद्रास्फीति में राहत मिल सकती है, जिससे उपभोक्ताओं को और सहूलियत मिलेगी।

इसके अतिरिक्त, भारत की कई अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों पर सक्रियता, अमेरिका में आर्थिक सुधार और वैश्विक व्यापारिक अनिश्चितताओं में कमी से निवेशकों का भरोसा भी बढ़ा है। इन सबके चलते भारत में निवेश के नए अवसरों के द्वार खुल सकते हैं, जो पूंजीगत व्यय चक्र को और मजबूत बनाएंगे।

यह अनुमान भारत के लिए एक सकारात्मक संकेत है, जो दर्शाता है कि वैश्विक अस्थिरता के बीच भी भारत की आर्थिक बुनियाद सशक्त बनी हुई है और सरकार की नीतियों का असर जमीनी स्तर पर दिख रहा है।

YuvaSahakar Desk