प्रशासक विद्याधर वी. अनासकर ने कुछ निजी क्षेत्र के बैंकों द्वारा कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड के कथित दुरुपयोग को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने RBI गवर्नर को भेजे विस्तृत प्रतिवेदन में आरोपों की स्वतंत्र जांच और तथ्य सही पाए जाने पर नियामकीय कार्रवाई की मांग की है।
प्रतिवेदन के अनुसार, कुछ निजी बैंक जिला परिषदों, नगर निगमों, नगर परिषदों और अन्य सरकारी तथा अर्ध-सरकारी संस्थाओं को CSR के तहत एयर कंडीशनर, वाहन, कंप्यूटर, फर्नीचर और अन्य सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं। अनासकर ने आशंका जताई है कि इन सुविधाओं का संबंध लाभार्थी संस्थाओं से बड़े जमा खाते हासिल करने की कोशिश से हो सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ऐसी CSR गतिविधियां वास्तव में सामाजिक कल्याण के लिए हैं या सार्वजनिक संस्थाओं के जमा निर्णयों को प्रभावित करने का अप्रत्यक्ष माध्यम बन रही हैं।
अनासकर ने Companies Act, 2013 की धारा 135 और CSR Policy Rules, 2014 का उल्लेख करते हुए कहा कि CSR खर्च निर्धारित कानूनी ढांचे के अनुरूप होना चाहिए। यदि इसका इस्तेमाल व्यावसायिक लाभ या संस्थागत जमा प्राप्त करने के लिए किया जाता है, तो इसकी वैधता और औचित्य पर सवाल उठते हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसी प्रथाएं सहकारी बैंकों के लिए असमान प्रतिस्पर्धी माहौल पैदा कर सकती हैं। साथ ही पारदर्शिता, नैतिक बैंकिंग और सार्वजनिक धन के जिम्मेदार प्रबंधन से जुड़े गंभीर मुद्दे भी सामने आते हैं। RBI से CSR खर्च के स्रोत, उद्देश्य और जमा जुटाने से संभावित संबंध की जांच करने का आग्रह किया गया है।


