केंद्र सरकार ने ‘विकसित भारत के लिए बैंकिंग’ पर उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है, जो देश के बैंकिंग क्षेत्र की व्यापक समीक्षा कर संरचनात्मक, संस्थागत, नियामकीय और विधायी सुधारों पर सुझाव देगी। खास बात यह है कि समिति को क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) और सहकारी बैंकों से जुड़े मौजूदा कानूनी और नियामकीय ढांचे की समीक्षा का भी स्पष्ट दायित्व दिया गया है।
समिति की अध्यक्षता पूर्व केंद्रीय सतर्कता आयुक्त सुरेश एन. पटेल करेंगे। इसमें आरबीआई के डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मू, इंडियन बैंक की पूर्व एमडी एवं सीईओ पद्मजा चुंदुरु और आरबीआई के पूर्व डिप्टी गवर्नर एन. एस. विश्वनाथन सदस्य होंगे। समिति का कार्यकाल छह महीने का होगा।
इस पहल की घोषणा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 में की थी। समिति बैंकिंग व्यवस्था को अधिक प्रतिस्पर्धी, समावेशी और मजबूत बनाने के लिए सुधारों की रूपरेखा तैयार करेगी।
सहकारी बैंकों के लिए यह समीक्षा विशेष महत्व रखती है, क्योंकि ये ग्रामीण क्षेत्रों, किसानों, छोटे कारोबारियों और वित्तीय सेवाओं से वंचित वर्गों तक ऋण और बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
समिति पूंजी आवश्यकताओं, प्राथमिकता क्षेत्र ऋण, लीड बैंक योजना, डिजिटल बैंकिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा और मानव संसाधन क्षमता जैसे विषयों की भी समीक्षा करेगी। इसकी सिफारिशें सहकारी बैंकिंग के नियामकीय ढांचे, संस्थागत विकास और भविष्य की कार्यप्रणाली पर महत्वपूर्ण असर डाल सकती हैं।


