NEET UG पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं को लेकर जुलाई 2026 में हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान हिंसा से संबंधित शिकायतें दर्ज कराने के लिए हाई-पावर्ड इंक्वायरी कमेटी (HPEC) का ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया गया है। प्रभावित लोग अब [https://hpec.nic.in](https://hpec.nic.in) के माध्यम से अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे।
शिकायत दर्ज कराने के लिए दो अलग फॉर्म
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित पांच सदस्यीय जांच समिति ने अदालत में दाखिल स्टेटस रिपोर्ट में बताया कि पोर्टल तैयार करने की जिम्मेदारी नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) को सौंपी गई थी। शिकायत प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए दो अलग-अलग फॉर्म तैयार किए गए हैं। पहला प्रदर्शन के दौरान प्रभावित नागरिकों के लिए, जबकि दूसरा पुलिसकर्मियों के लिए निर्धारित किया गया है। इसका मतलब यह है कि प्रदर्शन के दौरान जो लोग पुलिसिया हिंसा के शिकार हुए और जो पुलिस वाले या सुरक्षा कर्मी प्रदर्शनकारियों द्वारा पीटे गए, दोनों तरह के प्रभावित लोग इस पोर्टल पर शिकायत कर सकते हैं।
शिकायतकर्ताओं और गवाहों की गोपनीयता पर जोर
समिति ने बताया कि शिकायतों, साक्ष्यों और बयानों की गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने गृह मंत्रालय के माध्यम से NIC को पोर्टल में गवाहों की सुरक्षा से संबंधित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
अखबारों में जारी होंगे सार्वजनिक नोटिस
समिति के अनुसार, पोर्टल की जानकारी अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रमुख समाचार पत्रों में सार्वजनिक नोटिस प्रकाशित किए जाएंगे। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के जंतर-मंतर सहित देश के विभिन्न हिस्सों में छात्र प्रदर्शनों के दौरान कथित हिंसा की स्वतंत्र जांच के लिए समिति गठित की थी। इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं।
समिति पुलिस और अर्धसैनिक बलों द्वारा कथित अत्यधिक बल प्रयोग के साथ प्रदर्शनकारियों की ओर से सुरक्षाकर्मियों पर हिंसा के आरोपों की भी जांच करेगी। इसमें जस्टिस रवि शंकर झा, जस्टिस शालिंदर कौर, पूर्व CBI निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और पूर्व DGP डॉ. एल.आर. बिश्नोई शामिल हैं।


