उत्तर प्रदेश में प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के कर्मचारियों को पिछले आठ वर्षों से कथित तौर पर वेतन नहीं मिलने का मामला सामने आया है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने इस मुद्दे को उठाते हुए प्रदेश सरकार की बजटीय प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े किए हैं।
संजय सिंह के अनुसार, प्रदेश में कुल 7,266 प्राथमिक कृषि ऋण समितियां हैं, जिनमें से लगभग 5,127 समितियों में कार्यरत सचिवों, लेखाकारों और चौकीदारों को लंबे समय से वेतन नहीं मिला है। उन्होंने दावा किया कि कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए करीब 313 करोड़ रुपये की आवश्यकता है।
सांसद ने कहा कि वेतन भुगतान में लगातार देरी के कारण हजारों कर्मचारियों और उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब उत्तर प्रदेश सरकार का बजट सात से नौ लाख करोड़ रुपये तक पहुंच रहा है, तो सहकारी समितियों के कर्मचारियों के वेतन के लिए धनराशि का प्रावधान क्यों नहीं किया जा रहा।
संजय सिंह ने सरकार पर राजनीतिक मुद्दों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाते हुए कर्मचारियों के बकाया वेतन का शीघ्र भुगतान करने की मांग की।
उल्लेखनीय है कि प्राथमिक कृषि ऋण समितियां ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को ऋण और अन्य वित्तीय सुविधाएं उपलब्ध कराने वाली महत्वपूर्ण संस्थाएं हैं। हालांकि, वेतन बकाये से संबंधित दावों की आधिकारिक पुष्टि और राज्य सरकार की प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।


