विश्वविद्यालय का यह फैसला छात्रों और पूर्व विद्यार्थियों के विरोध के बाद सामने आया है। अगस्त में 2026 बैच के 165 विद्यार्थियों, अन्य बैचों के 409 छात्रों और 128 पूर्व विद्यार्थियों ने मुख्य न्यायाधीश को दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनाए जाने का विरोध किया था।
इससे पहले हैदराबाद स्थित NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ में भी मुख्य न्यायाधीश की भागीदारी को लेकर विरोध हुआ था। यह विवाद बेरोजगार युवाओं और छात्र आंदोलनों पर उनकी टिप्पणियों से जुड़ा था। NLSIU के विद्यार्थियों ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा की प्रस्तावित उपस्थिति पर भी आपत्ति जताई थी। विरोध के बीच विश्वविद्यालय ने 27 अगस्त को अपरिहार्य परिस्थितियों का हवाला देते हुए दीक्षांत समारोह रद्द करने की घोषणा की थी। हालांकि, सितंबर में विश्वविद्यालय ने अपना फैसला वापस लेते हुए 17 अक्टूबर को समारोह आयोजित करने का निर्णय लिया।
उस समय मुख्य न्यायाधीश की उपस्थिति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी। अब विश्वविद्यालय की आधिकारिक पुष्टि से यह अनिश्चितता समाप्त हो गई है। समारोह बेंगलुरु के ज्ञान ज्योति सभागार में आयोजित होगा, जहां विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की जाएंगी।


