अमेरिका में पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी करने की योजना बना रहे अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) कार्यक्रम के तहत पहली बार काम करने वाले विदेशी छात्रों के लिए 70,000 डॉलर शुल्क लगाने का प्रस्ताव दिया है। यह शुल्क संबंधित शिक्षण संस्थानों को देना होगा। प्रत्येक अगले नवीनीकरण पर 30,000 डॉलर शुल्क प्रस्तावित किया गया है।
OPT कार्यक्रम के तहत अंतरराष्ट्रीय छात्रों को पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने अध्ययन से संबंधित क्षेत्र में एक वर्ष तक काम करने की अनुमति मिलती है। विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) विषयों के पात्र छात्र कुल तीन वर्ष तक काम कर सकते हैं।
इस प्रस्ताव का भारतीय छात्रों पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है। शैक्षणिक सत्र 2024-25 में 3.63 लाख से अधिक भारतीय छात्रों ने अमेरिका में विभिन्न पाठ्यक्रमों में दाखिला लिया था। भारत अमेरिकी विश्वविद्यालयों में अंतरराष्ट्रीय छात्रों का सबसे बड़ा स्रोत रहा है।
DHS ने प्रस्तावित शुल्क को वीजा कार्यक्रम में कथित धोखाधड़ी और दुरुपयोग रोकने का उपाय बताया है। विभाग के अनुसार OPT कार्यक्रम का इस्तेमाल कुछ मामलों में सस्ते विदेशी श्रमिक उपलब्ध कराने के माध्यम के रूप में किया जा रहा है।
इस बीच अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों की अनुमानित संख्या 2025-26 के 11.69 लाख से घटकर 2026-27 में 10.57 लाख होने की बात सामने आई है।
प्रस्ताव पर जनता को 60 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर दिया गया है। इसके बाद विभाग अंतिम निर्णय ले सकता है। हालांकि उच्च शिक्षण संस्थानों और व्यावसायिक संगठनों की ओर से कानूनी चुनौती मिलने की संभावना भी है। फिलहाल यह प्रस्ताव है और लागू नहीं हुआ है।


