भारत के एम्सतलवीन (नीदरलैंड) और वावर (बेल्जियम) में खेले गए एफआईएच पुरुष हॉकी विश्व कप 2026 में सह मेजबान बेल्जियम से शूटआउट में हार आठवें स्थान पर रहने से चीफ कोच क्रेग फुल्टन की रणनीति पर सवाल उठे और उनकी खासी आलोचना भी हुई। दरअसल, विश्व कप के करीब एक पखवाड़े के बाद जापान में एशियाई खेल में शिरकत करना भारत ही नहीं किसी भी टीम के चुनौती है। फुल्टन ने विश्व कप में खासतौर पर जिस तरह मध्यपंक्ति में बेवजह प्रयोग किए और भारत बढ़त लेने के बाद जिस तरह इंग्लैंड के खिलाफ 2-1 की बढ़त के बाद तीसरे क्वॉर्टर के आखिर में पांच मिनट के भीतर दो गाल खाकर हारा उससे ही उसके सेमीफाइनल में पहुंचने का गणित गड़बड़ा गया। इसी से सबसे बड़ा सवाल यह उठा कि क्या विश्व कप भारत के चीफ कोच फुल्टन की प्राथमिकता ही नहीं था और उनके लिए एशियाई खेल ज्यादा अहम थे।
खैर अब इस सब बहस को दरकिनार कर भारत के सामने आईची-नगोया (जापान) में अपना स्वर्ण पदक बरकरार रखने 2028 के लॉस एंजेल्स के लिए सीधे क्वॉलिफाई करने की चुनौती है। ड्रैग फ्लिकर हरमनप्रीत सिंह की अगुआई में भारत पुरुष हॉकी टीम अब पूल ए में इंडोनेशिया के खिलाफ रविवार को पहले मैच के लिए कमर कस चुकी है।ड्रैग फ्लिकर हरमनप्रीत सिंह की अगुआई में भारत पुरुष हॉकी टीम अब पूल ए में इंडोनेशिया के खिलाफ रविवार को पहले मैच के लिए कमर कस चुकी है। भारतीय पुरुष हॉकी टीम के एशियाड में व्यस्त कार्यक्रम के बीच चीफ कोच क्रेग फुल्टन से बात की।
भारतीय पुरुष हॉकी टीम के इस बार जापान में एशियाई खेलों में यदि अपना स्वर्ण बरकरार रखती है तो नया इतिहास रच देगी इस बाबत टीम के चीफ कोच क्रेग फुल्टन कहते हैं, ‘इस बार के एशियाई खेल पिछले संस्करण से अलग हैं। बावजूद ये एशियाई खेल ही हैं, लेकिन हालात इस बार बिल्कुल अलग हैं। 2023 के एशियाई खेल से ठीक पहले हमने एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी खेली थी और उसमें हम तब एशियाई खेलों में शिरकत करने वाली सभी एशियाई टीमों के खिलाफ ठीक उससे पहले खेले थे। हम इस बार हम एशियाई खेलों से पहले एफआईएच पुरुष हॉकी विश्व कप 2026 में खेले। हमारा पूरा ध्यान अपन खुद के खेल पर होता है। हम किसी ओर की बाबत बहुत ज्यादा नहीं सोचते हैं।
एशियाई खेलों में हमारा पहला लक्ष्य अपने पूल में शीर्ष पर रहने की कोशिश करना है। दरअसल इस बार हमारे पास पुरुष हॉकी विश्व कप और एशियाई खेलों के बीच बहुत वक्त ही नहीं था। बावजूद इसके एशियाई खेलों में शानदार को बेताब हैं। हमने अपनी तैयारियों का आगाज एक मुश्किल से आंखें खोल देने वाले अनुभव किया। जैसे कि हम दुनिया के एक अपने लिए अनजाने से ऐसे हिस्से माउंट फूजी में गए जहां हम बतौर टीम कभी नहीं गए थे। वहां हमारी कोशिश पूरी अपना ध्यान सिर्फ और सिर्फ टीम पर लगाने की रही न कि केवल निजी कोशिशों पर। जहां तक पुरुष हॉकी विश्व कप में संघर्ष के बाद माउंट फूजी के अनुभव से टीम को फिर से एकजुट होने में मदद करने की बात है तो मैं कहूंगा कि वहां हमें ऐसा करने का मौका मिला। जहां तक बात 2026 के विश्व कप में ढीले प्रदर्शन की है तो हमने उसका विश्लेषण करने के बाद यह जाना कि एशियाई खेलों में हमें किन चीजों पर ज्यादा ध्यान देने और क्या सुधारने की जरूरत है। विश्व कप में खेलने वाले आदित्य अर्जुन ललगे की जगह एशियाई खेलों के लिए टीम राज कुमार पाल में वापसी हो चुकी है। अब हम रविवार को एशियाई खेलों के रूप में एक नए टूर्नामेंट में खेलने उतर रहे हैं।’
वह कहते हैं, ’एफआईएच हॉकी विश्व कप 2026 में आठवें स्थान पर रहने के बाद हमारी तमन्ना उससे सबक ले बेशक एशियाई खेलों में बतौर टीम प्रदर्शन करने की है। एशियाई खेलों में हमारी कोशिश बेशक बेहतर प्रदर्शन की है। हमने उस हर चीज पर चर्चा की जहां हमें अपना खेल बेहतर करने की जरूरत है। साथ ही हमने अभ्यास में जो मेहनत की उसे अब रविवार को एशियाई खेलों में अपने पहले मैच में दिखाने का वक्त आ गया है। जहां तक एशियाई खेलों में पूल मैचों के एकतरफा रहने के बाद नॉकआउट मैचों के लिए सही वक्त रंगत पाने की बात है तो इस बाबत मैं बस यही कहूंगा कि हमारे सामने जो भी खेलेगा तो हमारी कोशिश उसे एक प्रतिद्वंद्वी मान उसके खिलाफ अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की रही है और रहेगी। हमने ऐसा ही किया है और सभी टूर्नामेंट में हम ऐसा करना जारी रहेंगे। आप बेशक हमारी टीम से यही उम्मीद कर सकते हैं।’


