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सुप्रीम कोर्ट ने NALSAR छात्रों के खिलाफ BCI का निर्देश रद्द किया

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को लॉ छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है

Disciplinary Control Over Law Students Rests With Universities, Says Supreme Court


Published: 09:30am, 04 Sep 2026

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को लॉ छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है। अदालत ने कहा कि किसी लॉ यूनिवर्सिटी या संस्थान में पढ़ रहे छात्रों के आचरण और अनुशासन से जुड़े मामलों में कार्रवाई संबंधित शैक्षणिक संस्थान अपने नियमों के अनुसार करेगा।

मामला हैदराबाद स्थित नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (NALSAR) यूनिवर्सिटी के 2026 बैच के छात्रों से जुड़ा है। दीक्षांत समारोह के दौरान कुछ छात्रों द्वारा चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्य कांत के विरोध के बाद BCI ने एक नोटिफिकेशन जारी किया था। इसमें NALSAR से 2026 में कानून की पढ़ाई पूरी करने या डिग्री हासिल करने वाले छात्रों को वकील के रूप में नामांकित न करने का निर्देश दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने BCI के इस निर्देश को रद्द कर दिया। चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि जब तक कोई छात्र वकील के रूप में एनरोल नहीं होता, तब तक उस पर अनुशासनात्मक नियंत्रण संबंधित यूनिवर्सिटी या शिक्षण संस्थान का ही रहेगा।

पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे। अदालत ने कहा कि एडवोकेट्स एक्ट 1961 के तहत BCI को कानूनी शिक्षा के मानक तय करने और उन्हें लागू करने का अधिकार जरूर है, लेकिन यह कानून उसे लॉ छात्रों के खिलाफ सीधे अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की शक्ति नहीं देता।

वकील के रूप में नामांकन के बाद ही BCI का पेशेवर अनुशासन संबंधी अधिकार लागू होता है।

Jitendra