NEET-UG 2026 से जुड़े विरोध-प्रदर्शनों में शामिल छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने निर्देश दिया है कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR रद्द मानी जाएंगी। हालांकि, जिन लोगों का गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड है, उन्हें इस राहत के दायरे से बाहर रखा गया है।
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश केंद्र सरकार के उस आश्वासन के बाद आया, जिसमें सरकार ने कहा था कि 20 जुलाई के विरोध-प्रदर्शन से जुड़े मामलों को वापस लिया जाएगा और भविष्य में भी इस प्रदर्शन के संबंध में कोई नया मामला दर्ज नहीं किया जाएगा।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि दिल्ली पुलिस के साथ बिहार, असम, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र की सरकारों ने भी छात्रों पर दर्ज FIR खत्म करने के लिए आवेदन दिए हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार और प्रदर्शनकारी पक्ष के बीच बातचीत और सकारात्मक रुख की सराहना की।
हालांकि, दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में शामिल 2,873 लोगों में से कुछ के खिलाफ दर्ज एक FIR में कार्रवाई आगे बढ़ाने की अनुमति दी गई है। यह छूट उन लोगों से जुड़ी है जिनका गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले और केंद्र सरकार के आश्वासन के बाद CJP ने 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित मार्च वापस लेने का फैसला किया है। संगठन के प्रवक्ता सौरभ दास ने कहा कि अदालत के आदेश और सरकार के सकारात्मक रुख को देखते हुए मार्च रद्द किया गया है।
पीड़ित परिवारों के मुआवजे पर भी निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने और पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने के मुद्दे पर भी निर्देश दिए हैं। केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि वह मुआवजा देने के अपने वादे पर कायम है और प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए तीन महीने का समय मांगा है। अदालत ने केंद्र को तीन महीने के भीतर मुआवजे की पूरी प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है।


