प्राकृतिक आपदा, बेमौसम बारिश या कीटों के कारण फसल बर्बाद होना किसी भी किसान के लिए बड़ा आर्थिक झटका बन सकता है। ऐसे समय में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम कर रही है। 2016 में शुरू हुई इस योजना के तहत सूखा, बाढ़, चक्रवात, ओलावृष्टि, जलभराव, कीट, बीमारी, बुआई न हो पाना और कटाई के बाद होने वाले कुछ नुकसानों को भी कवर किया जाता है। 2026–27 के लिए सरकार ने योजना के लिए ₹12,200 करोड़ का प्रावधान किया है।
योजना के दस वर्षों में 92.46 करोड़ से ज्यादा किसान आवेदनों का बीमा किया जा चुका है और 26.33 करोड़ से अधिक आवेदनों के लिए ₹2.06 लाख करोड़ से ज्यादा के दावे दिए गए हैं। अकेले खरीफ 2026 में 27 अगस्त तक 241.38 लाख किसानों और 278.12 लाख हेक्टेयर क्षेत्र का बीमा हो चुका था। खरीफ 2025 के लिए 60.89 लाख पात्र किसानों को ₹9,837.61 करोड़ के दावे भी दिए जा चुके हैं।
योजना का असर असम के नागांव जिले के किसान अनवर हुसैन की कहानी से समझा जा सकता है। भारी बारिश से उनकी फसल को नुकसान हुआ, लेकिन उन्होंने केवल ₹100 प्रीमियम देकर फसल बीमा कराया था। नुकसान के आकलन के बाद उन्हें ₹50,600 का मुआवजा मिला, जिससे वे कर्ज चुकाने और अगली फसल की तैयारी करने में सफल रहे।
किसानों के लिए प्रीमियम भी किफायती रखा गया है। खरीफ फसलों पर अधिकतम 2 प्रतिशत, रबी की खाद्यान्न और तिलहन फसलों पर 1.5 प्रतिशत और वाणिज्यिक व बागवानी फसलों पर 5 प्रतिशत तक प्रीमियम देना होता है। डिजिटल क्लेम, YES-TECH और मौसम डेटा जैसी तकनीकों के उपयोग से योजना को अधिक पारदर्शी और तेज बनाया जा रहा है।


