Trending News

केरल की लिज मैजो को मिस यूनिवर्स इंडिया 2026 का खिताब मिला यूपी में देर रात बड़ा प्रशासनिक फेरबदल,17 IAS के तबादले इंडियन ग्रैंडमास्टर प्रणेश एम ने मशहूर कनिजसा ओपन 2026 चेस टूर्नामेंट जीता JPSC में अनियमितताओं की CBI जांच की मांग पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई यूपी के 2 दिवसीय दौरे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, आज से शुरुआत केरल की लिज मैजो को मिस यूनिवर्स इंडिया 2026 का खिताब मिला यूपी में देर रात बड़ा प्रशासनिक फेरबदल,17 IAS के तबादले इंडियन ग्रैंडमास्टर प्रणेश एम ने मशहूर कनिजसा ओपन 2026 चेस टूर्नामेंट जीता JPSC में अनियमितताओं की CBI जांच की मांग पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई यूपी के 2 दिवसीय दौरे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, आज से शुरुआत

8.7 करोड़ युवा बेरोजगार, नीति आयोग ने कौशल और अवसर बढ़ाने पर दिया जोर

भारत दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देशों में शामिल है, यही युवा शक्ति आने वाले वर्षों में देश की आर्थिक वृद्धि की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है

NITI Aayog Calls for Affordable Skill Training as Millions of Youth Remain NEET


Published: 11:38am, 24 Aug 2026

भारत दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देशों में शामिल है। यही युवा शक्ति आने वाले वर्षों में देश की आर्थिक वृद्धि की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है। लेकिन नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट ने रोजगार को लेकर एक गंभीर चुनौती सामने रखी है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के करीब 8.7 करोड़ युवा ऐसे हैं जो न पढ़ाई कर रहे हैं, न रोजगार में हैं और न ही किसी प्रशिक्षण से जुड़े हैं।

नीति आयोग की रिपोर्ट ‘विकसित भारत@2047 के लिए कौशल विकास की पुनर्कल्पना’ में इन युवाओं को NEET यानी Not in Education, Employment or Training श्रेणी में रखा गया है। यह अनुमान राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण के 78वें दौर के आंकड़ों पर आधारित है।

रोजगार तक पहुंच सबसे बड़ी चुनौती

रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण संकेत यह है कि केवल रोजगार पैदा करना पर्याप्त नहीं होगा, युवाओं को उन नौकरियों के योग्य बनाने के लिए सही कौशल भी देना होगा। नीति आयोग के अनुसार, बड़ी संख्या में युवा आर्थिक कारणों, कौशल की कमी और स्थानीय स्तर पर अवसरों के अभाव के कारण रोजगार की मुख्यधारा से बाहर रह जाते हैं।

कम आय वाले परिवारों के युवाओं के लिए प्रशिक्षण का खर्च भी बड़ी बाधा है। कई छात्र पढ़ाई पूरी करते ही परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियां संभालने के लिए किसी भी उपलब्ध नौकरी को स्वीकार कर लेते हैं। ऐसे में वे अतिरिक्त कौशल प्रशिक्षण पर पैसा और समय नहीं लगा पाते।

डिग्री है, लेकिन योग्यता के अनुरूप नौकरी नहीं

रिपोर्ट में स्नातक युवाओं की स्थिति भी चिंता बढ़ाती है। इसके अनुसार, केवल 8.25 प्रतिशत स्नातक ही अपनी शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप रोजगार में हैं। इसका मतलब यह है कि उच्च शिक्षा हासिल करने के बावजूद बड़ी संख्या में युवा ऐसे काम कर रहे हैं जिनमें उनकी शिक्षा और कौशल का पूरा उपयोग नहीं हो रहा।

नीति आयोग ने इसका एक प्रमुख कारण व्यावहारिक शिक्षा और उद्योग की जरूरतों के मुताबिक प्रशिक्षण की कमी को माना है।

स्थानीय मांग के मुताबिक कौशल जरूरी

रिपोर्ट में युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए सस्ते और सब्सिडी वाले कौशल प्रशिक्षण की जरूरत बताई गई है। इसके साथ ही ऐसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण बढ़ाने की सिफारिश की गई है जहां आने वाले वर्षों में नौकरियों की मांग तेजी से बढ़ सकती है।

इनमें ग्रीन इंडस्ट्री, इलेक्ट्रिक वाहन, डिजिटल तकनीक, विनिर्माण और अन्य उभरते क्षेत्र शामिल हैं। छोटे और मध्यम उद्योगों में इंटर्नशिप बढ़ाने से युवाओं को पढ़ाई के साथ वास्तविक कार्य अनुभव भी मिल सकता है।

स्वरोजगार और उद्यमिता को भी रोजगार रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। स्थानीय बाजार और जिले की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण देने से युवाओं को अपने क्षेत्र में ही रोजगार या व्यवसाय शुरू करने का अवसर मिल सकता है।

प्रशिक्षण हुआ, अब रोजगार परिणाम पर जोर

नीति आयोग के अनुसार, 2014-15 से अब तक 7.67 करोड़ से अधिक लोगों को कौशल प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में युवाओं का शिक्षा, प्रशिक्षण और रोजगार से बाहर होना बताता है कि अगले चरण में केवल प्रशिक्षण की संख्या नहीं, बल्कि प्रशिक्षण के बाद मिलने वाले रोजगार और आय पर भी ध्यान देना होगा।

विकसित भारत 2047 का लक्ष्य तभी मजबूत आधार पाएगा जब युवाओं के पास डिग्री के साथ रोजगार योग्य कौशल, उद्योग से जुड़ा प्रशिक्षण और सम्मानजनक आय के अवसर भी हों। भारत की युवा आबादी तभी वास्तविक आर्थिक शक्ति बनेगी, जब कौशल विकास सीधे रोजगार से जुड़ेगा।

Jitendra