देश के डेयरी क्षेत्र को संगठित, टिकाऊ और किसान-केंद्रित बनाने के लिए श्वेत क्रांति 2.0 के तहत बड़े पैमाने पर सहकारी नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। अभियान का लक्ष्य 75,000 नई डेयरी सहकारी समितियां (डीसीएस) बनाना और 46,422 मौजूदा समितियों को सशक्त करना है। अब तक 24,097 नई समितियां गठित और 31,394 मौजूदा समितियां मजबूत की जा चुकी हैं।
पांच वर्षों में नई समितियां बनाने के राज्यवार लक्ष्य भी तय किए गए हैं। इनमें उत्तर प्रदेश में 10,130, ओडिशा में 8,547, राजस्थान में 8,012, आंध्र प्रदेश में 7,042, बिहार में 6,544, मध्य प्रदेश में 5,064 और छत्तीसगढ़ में 4,300 नई समितियां बनाने का लक्ष्य है। कर्नाटक में 3,311, पश्चिम बंगाल में 2,491, महाराष्ट्र में 2,428, असम में 2,400 और पंजाब में 2,378 समितियां गठित करने की योजना है।
बिहार में 2024-25 के दौरान 2,320 के लक्ष्य के मुकाबले 2,222 नई समितियां बनीं। वर्ष 2025-26 में 3,000 के लक्ष्य के मुकाबले 1,875 समितियां गठित की गई हैं। वहीं, मौजूदा समितियों के सशक्तीकरण में राज्य ने 2025-26 के 2,985 के लक्ष्य को पार करते हुए 3,124 समितियों को मजबूत किया।
महाराष्ट्र ने 2024-25 में 133 नई समितियों के लक्ष्य के मुकाबले 735 समितियां बनाकर बेहतर प्रदर्शन किया। वर्ष 2025-26 में 913 के लक्ष्य के मुकाबले 316 नई समितियां गठित हुईं। इसी अवधि में 985 समितियों के सशक्तीकरण के लक्ष्य के मुकाबले 244 समितियों को मजबूत किया गया।
अन्य राज्यों में पांच वर्षों के दौरान झारखंड में 1,900, हरियाणा में 870, जम्मू-कश्मीर में 960, उत्तराखंड में 1,662, तमिलनाडु में 1,616, तेलंगाना में 1,525 और हिमाचल प्रदेश में 1,320 नई समितियों का लक्ष्य रखा गया है। छोटे राज्यों में मेघालय के लिए 415, मणिपुर के लिए 306, केरल के लिए 170 और गोवा के लिए 41 समितियों का लक्ष्य निर्धारित है।
योजना का उद्देश्य अगले पांच वर्षों में सहकारी क्षेत्र के दूध संग्रह में 50 प्रतिशत वृद्धि करना है। वर्ष 2028-29 तक सहकारी समितियों के माध्यम से प्रतिदिन 1,007 लाख किलोग्राम दूध खरीदने का लक्ष्य रखा गया है।
नई समितियों को बल्क मिल्क कूलर, स्वचालित दूध संग्रह इकाइयों, गुणवत्ता जांच उपकरण, प्रसंस्करण एवं शीतलन ढांचे के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता दी जाएगी। करीब 70 प्रतिशत डेयरी कार्यबल महिलाओं का है, इसलिए योजना में महिला किसानों को संगठित बाजार, उचित मूल्य और सहकारी संस्थाओं से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है।
इसके साथ गोमय प्रबंधन, बायोगैस, जैविक खाद, पशु चारा, पशु स्वास्थ्य और प्रजनन सेवाओं के लिए विशेष बहु-राज्य सहकारी संस्थाएं विकसित की जा रही हैं। इससे छोटे किसानों की आय, महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और ग्रामीण डेयरी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।


