केंद्र सरकार “10,000 किसान उत्पादक संगठनों के गठन और संवर्धन” के लिए केंद्रीय क्षेत्र योजना लागू कर रही है। वर्ष 2020-21 से अब तक योजना के अंतर्गत 10,000 किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) का गठन किया जा चुका है। इनसे 65 लाख से अधिक शेयरधारक जुड़े हैं, जिनमें अधिकांश छोटे और सीमांत किसान हैं।कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से यह जानकारी दी।
योजना के तहत प्रत्येक एफपीओ को शुरुआती तीन वर्षों के दौरान प्रबंधन और हैंडहोल्डिंग खर्च के लिए अधिकतम 18 लाख रुपये की सहायता दी जाती है। पात्र एफपीओ को पूंजी आधार मजबूत करने के लिए 15 लाख रुपये तक का मैचिंग इक्विटी अनुदान मिलता है। इसके अतिरिक्त दो करोड़ रुपये तक के परियोजना ऋण पर क्रेडिट गारंटी सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
अब तक एफपीओ को प्रबंधन लागत के रूप में 827.81 करोड़ रुपये और मैचिंग इक्विटी अनुदान के रूप में 631.98 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। वर्ष 2024-25 के वित्तीय विवरण के अनुसार 6,964 एफपीओ का कारोबार 50 लाख रुपये तक, 862 का कारोबार 50 लाख से एक करोड़ रुपये और 1,135 एफपीओ का कारोबार एक करोड़ रुपये से अधिक रहा।
वर्तमान में 6,928 एफपीओ के पास बीज, 4,987 के पास कीटनाशक और 6,650 के पास उर्वरक लाइसेंस हैं। कुल 5,765 एफपीओ अपनी प्रसंस्करण इकाइयां संचालित कर रहे हैं, जबकि 3,083 ने ऋण गारंटी सुविधा का लाभ लिया है।


