लोकसभा ने विपक्ष के हंगामे के बीच लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस संशोधन विधेयक में पेपर लीक के दोषियों की सजा को बढ़ाकर 10 वर्ष करने और 10 करोड़ रुपये जुर्माने जैसे कड़े प्रावधान किए गए हैं। सरकार ने इसे सार्वजनिक परीक्षाओं की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता मजबूत करने वाला कदम बताया। विधेयक पर चर्चा के दौरान सदन में तीखी राजनीतिक नोकझोंक हुई।
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर छात्रों पर कथित गोलीबारी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेकर आरोप लगाए, जिस पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध जताया। इसके बाद सदन में छात्रों के आंदोलन, शिक्षा व्यवस्था और संसदीय भाषा को लेकर विवाद बढ़ गया। विपक्ष ने परीक्षा प्रणाली की खामियों और छात्रों की समस्याओं का मुद्दा उठाया, जबकि सरकार ने कहा कि संशोधन कानून को अधिक प्रभावी बनाएगा।
चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार नीट पेपर लीक मामले में तेजी से कार्रवाई कर चुकी है और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में एंटी पेपर लीक कानून लागू होने के बाद अब तक 52 एफआईआर दर्ज की गई हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि पेपर लीक से जुड़े मामलों के कारण होने वाली आत्महत्याओं में कमी आई है, जो कानून के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाती है।
सरकार ने कहा कि संशोधन पिछले अनुभवों से सीख लेकर सार्वजनिक परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के उद्देश्य से लाया गया है। हंगामे के बावजूद विधेयक ध्वनिमत से पारित हो गया। इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।


