दमदार मिडफील्डर और मजबूत मध्यपंक्ति मॉडर्न हॉकी की सबसे बड़ी ताकत है। मिडफील्डरों की किसी भी हॉकी टीम की विश्व कप जैसे सबसे टूर्नामेंट में सबसे अहम और मुश्किल भूमिका होती है। बात चाहे गेंद को अपने कब्जे मे रखने की, गेंद को प्रतिद्वंद्वी से छीनने के बाद मैच की स्थिति को भांप कर साथी खिलाड़ी के आगे बढ़ाने, या फिर आपस में संवाद कर आगे बढ़ाने की मिडफील्डरों को तुरंत फुरत मैदान पर इसका फैसला लेना पड़ता है। हॉकी में भले ही मिडफील्डरों का नाम गोल करने वालों की सूची में कम ही दिखाई पड़ता है लेकिन टीम के हर आक्रमण और रक्षण की नींव वही रखते हैं। 15 से 30 अगस्त तक होने वाले एफआईएच हॉकी विश्व कप बेल्जियम और नीदरलैंड 2026 में भारत के हमलों और रक्षण की धड़कन साबित होंगे उसके मिडफील्डर मनप्रीत सिंह, हार्दिक सिंह, विवेक सागर प्रसाद, नेहा और साक्षी राणा।
पिछले लगातार दो ओलंपिक में कांसा जीतने वाली भारतीय टीम के अहम सदस्य रहे आक्रमण और रक्षण की सबसे अहम कड़ी रहे सबसे अनुभवी मिडफील्डर मनप्रीत सिंह, हार्दिक सिंह और विवेक सागर प्रसाद हॉकी विश्व कप 2026 में पहले रक्षण और फिर जवाबी हमलों पर भरोसा कर गोल करने में यकीन करने वाले पुरुष टीम के चीफ कोच क्रेग फुल्टन की तुरुप के इक्के साबित होने वाले हैं। यह पहला मौका है जब पुरुष और महिला हॉकी विश्व कप 2026 के मैच एक ही जगह पर खेले जाएंगे। भारत की पुरुष हॉकी टीम विश्व कप में पूल डी में वेल्स, इंग्लैंड व पाकिस्तान के साथ है। वहीं भारतीय महिला हॉकी टीम को विश्व कप में पूल डी में चीन, दक्षिण अफ्रीका के साथ रखा गया है। वहीं सबसे अनुभवी मिडफील्डर रही नेहा और नवोदित साक्षी राणा का कौशल बहुत हद तक यह तय करेगा कि चीफ कोच शुएर्ड मराइन के मार्गदर्शन में भारतीय हॉकी टीम की चुनैती महिला हॉकी विश्व कप 2026 में कहां तक जाएगी।
बतौर मिडफील्डर जिम्मेदारी टीम को जोड़े रख कर चलना: मनप्रीत
एफआईएच प्रो हॉकी लीग 2025-26 के दौरान पूर्व ओलंपियन दिलीप तिर्की के भारत के लिए सबसे ज्यादा 412 अंतर्राष्ट्रीय हॉकी मैच खेलने खेलने के रिकॉर्ड को तोड़ने वाले मिडफील्डर मनप्रीत सिंह की भूमिका हॉकी विश्व कप में महज साथी स्ट्राइकरों के लिए आगे गेंद बढ़ाने और पीछे आकर बचाव तक ही सीमित नहीं है। मनप्रीत ने हॉकी विश्व कप में भारतीय पुरुष हॉकी टीम में बतौर मिडफील्डर अपनी भूमिका की बाबत कहा, ‘बतौर मिडफील्डर मेरी सबसे सबसे जिम्मेदारी टीम को जोड़े रखकर चलना है। हॉकी टीम में हम मिडफील्डर आक्रमण और रक्षण के बीच की अहम कड़ी हैं। हम मिडफील्डरों की जिम्मेदारी हॉकी विश्व कप में पूरे मैच में अपने ढांचे पर काबिज रहने के साथ टीम की लय बनाए रखना है। मेरा ध्यान गेंद को पास कर आगे साथी खिलाड़ी तक पहुंचने और अपने किले की चौकसी के साथ प्रतिद्वंद्वी के किले में दरार तलाश कर साथियों की मदद कर तुरत से फ़ैसले लेने और मैच में टीम को बराबर व्यवस्थित करने पर रहता है।’
मिडफील्डर के लिए संवाद, बराबर जागरूक व चौकस रहना अहम : हार्दिक सिंह
वहीं भारत की मध्यपंक्ति की जान बेहद शांत आक्रामक सेंटर हाफ हार्दिक सिंह ने टीम मे अपनी भूमिका की बाबत साथी मिडफील्डर मनप्रीत सिंह की राय से इत्तफाक जताया। हार्दिक सिंह हॉकी विश्व कप में भारतीय पुरुष टीम में बतौर मिडफील्डर कहते हैं,‘ हॉकी टीम में मिडफील्डर की भूमिका महज उसके तकनीकी कौशल तक ही सीमित नहीं होती, बल्कि इसमें साथियों से संवाद,जागरूकता और हॉकी की समझ भी शामिल होती है। मिडफील्डर के लिए संवाद और मैच में बराबर जागरूक और चौकस रहना बेहद अहम होता क्योंकि आपको पूरे मैच में टीम का संतुलन बनाए रखना होता है। आप यदि अपने प्रतिद्वंद्वियों को गेंद ले जाने के बहुत मौके दे देते है तो आप अपनी प्रतिद्वंद्वी टीम को मैच पर पकड़ बनाने के बहुत मौके दे देते हैं। मिडफील्डर के लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि कब हमले में शामिल होना है और कब अपनी जगह रह कर यह समझना जरूरी है कि कब आपको साथी फॉरवर्ड के लिए गेंद बढ़ानी है।‘
मिडफील्डर के लिए अहम किस साथी के गेंद बढ़ानी है: विवेक सागर
भारत की पुरुष हॉकी टीम के नौजवान मिडफील्डर विवेक सागर प्रसाद ने कहा,‘ मिडफील्डर के लिए सबसे अहम फैसला यह होता है कि कब गेंद को साथी खिलाड़ी के लिए बढ़ाना है कब खुद आगे लेकर बढ़ना है। जब मुझे गेंद मिलती है तो सबसे पहले मैं स्थिति का आकलन करता हूं फिर आगे की बाबत फैसला लेता हूं। मेरा हमेशा से मानना रहा है कि गेंद खिलाड़ी से कहीं ज्यादा तेजी से निकलती है। जब भी मुमकिन होता है तो जल्दी से गेंद उस खिलाड़ी को पास करता हूं जो कि गेंद को आगे बढ़ने के लिए सबसे बेहतर स्थिति में होता है। मिडफील्डर के यह भी भांपना भी जरूरी होता है कब खुद गेंद को लेकर आगे बढ़ना है। बतौर आक्रामक हाफ मैं प्रतिद्वंद्वी टीम के हाफ में जोखिम लेने को तैयार रहता हूं। मैं यदि अपने हाफ में दबाव में होता हूं तो मेरा ध्यान गेंद को अपने कब्जे मे रखने और टीम को खेल आगे बढ़ाने में मदद करने पर रहता हूं।`
मिडफील्डरों के लिए डिफेंडरों और फॉरवर्ड के साथ कदमताल जरूरी : नेहा
अनुभवी मिडफील्डर नेहा महिला हॉकी टीम विश्व कप 2026 मे भारतीय टीम की अहम कड़ी साबित होने वाली हैं। नेहा ने कहा कि वह मिडफील्डर टीम मे डिफेंडर और फॉरवर्ड के साथ बेहतर तालमेल बैठाने के लिए मिलकर खूब अभ्यास करती हैं। नेहा ने कहा, ‘हम मिडफील्डरों के लिए डिफेंडरो और फॉरवर्ड, दोनों के साथ कदमताल जरूरी है। हम अभ्यास के दौरान बराबर विडियो क्लिप का विश्लेषण करते हैं। साथ ही इस दौरान हमारा ध्यान खासतौर पर साथी खिलाड़ियों से आंखों ही आंखों में इशारों के साथ गेंद हासिल करने से पहले छोटी से छोटी जानकारी पर रहता है, जिससे कि हमें मैचों में मैदान पर बेहतर फैसले लेने में मदद मिलती है। हमला बोलने के दौरान हमें प्रतिद्वंद्वी पर कहां दबाव बनाना है। जब हम हमला बोल रहे हों तो हमें यह भी ध्यान रखना होता है कि प्रतिद्वंद्वी टीम पर कहां दबाव बनाना है। जब गेंद हमारे पास होती तो स्थिति को पहले ही भांप लेने से प्रतिद्वंद्वी टीम के हाफ में गेंद को लेकर आगे बढ़ने में मदद मिलती है। हम इन्हीं सब का बराबर अभ्यास करते हैं।’
मिडफील्डर की सबसे बड़ी खूबी दबाव में धैर्य बनाए रखना: साक्षी
भारतीय महिला हॉकी टीम की नौजवान मिडफील्डर साक्षी राणा कहती हैं दबाव में धैर्य बनाए रखना मिडफील्डर की सबसे बड़ी खूबी होती है। साक्षी कहती हैं, ‘दबाव में जब मुझे गेंद मिलती है तो मेरे जेहन में सबसे पहले यह आता है कि मुझे धैर्य बनाए रखना है। मैं गेंद के अपने पास आने से पहले अपने जेहन में मैदान की तस्वीर बना लेती हूं, जिससे मुझे मालूम पड़ जाता है कि टीम की मेरी साथी खिलाड़ी कहां हैं। इससे मुझे तुरत यह फैसला लेने में मदद मिलती है कि मुझे गेंद को कहां किसी ओर बढाना है या फिर दिशा बदलनी है।‘


