केंद्र सरकार ने साइबर अपराध और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी से निपटने के लिए भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र यानी आई4सी के माध्यम से तकनीकी, संस्थागत और कानूनी व्यवस्था को मजबूत किया है। गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने लोकसभा में बताया कि जून 2026 तक 32.80 लाख से अधिक शिकायतों में ठगी की ₹11,158 करोड़ से अधिक राशि को अपराधियों के पास जाने से बचाया गया है।
साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की तुरंत शिकायत के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल और टोल-फ्री हेल्पलाइन 1930 संचालित की जा रही है। आई4सी में स्थापित साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर में बैंक, भुगतान कंपनियां, दूरसंचार सेवा प्रदाता, आईटी कंपनियां और राज्यों की पुलिस मिलकर तत्काल कार्रवाई कर रही हैं।
सरकार ने पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर 15.75 लाख से अधिक सिम कार्ड और 5.77 लाख मोबाइल आईएमईआई नंबर ब्लॉक किए हैं। साइबर अपराधियों की पहचान के लिए तैयार संदिग्ध रजिस्ट्री में बैंकों से प्राप्त 30.48 लाख संदिग्ध पहचान विवरण और 32.08 लाख प्रथम स्तर के म्यूल खातों की जानकारी साझा की गई है। इसके माध्यम से ₹25,698 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन रोके गए।
‘समन्वय’ और ‘प्रतिबिंब’ प्लेटफॉर्म की सहायता से राज्यों के बीच जुड़े साइबर अपराधों और अपराधियों की पहचान की जा रही है। इनके इस्तेमाल से 29,837 से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है और 2.33 लाख से अधिक जांच सहायता अनुरोधों पर कार्रवाई की गई है।
पुलिस और न्यायिक अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए ‘साइट्रेन’ पोर्टल पर 1.63 लाख से अधिक अधिकारी पंजीकृत हैं और 1.61 लाख से अधिक प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं। अब तक 281 साइबर कमांडो भी विशेष प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं।अप्रैल 2026 से ठगी की रकम पीड़ितों को शीघ्र लौटाने और बैंक खातों की फ्रीजिंग से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए अलग मॉड्यूल भी शुरू किए गए हैं। सरकार जागरूकता के लिए सोशल मीडिया, एसएमएस, रेडियो, टेलीविजन, स्कूलों, रेलवे स्टेशनों, हवाई अड्डों और मेट्रो नेटवर्क के माध्यम से अभियान चला रही है।


