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मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को बड़ा प्रोत्साहन, 62,500 करोड़ रुपये की MPMS योजना को मंजूरी

भारत को वैश्विक मोबाइल फोन विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 62,500 करोड़ रुपये की मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) को मंजूरी दी है। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए लागू रहेगी।

Smartphone Production Mobile Exports


Published: 10:00am, 16 Jul 2026

भारत को वैश्विक मोबाइल फोन विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 62,500 करोड़ रुपये की मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) को मंजूरी दी है। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए लागू रहेगी।

योजना का उद्देश्य देश में मोबाइल फोन उत्पादन बढ़ाने के साथ घरेलू मूल्य संवर्धन, अनुसंधान एवं विकास, भारतीय ब्रांड निर्माण और आपूर्ति शृंखला को मजबूत करना है। सरकार का अनुमान है कि योजना की अवधि में करीब 39 लाख करोड़ रुपये के मोबाइल फोन का उत्पादन होगा और लगभग 60,000 प्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे।

MPMS के तहत पात्र कंपनियों को उनकी बिक्री पर 2.25 प्रतिशत से 5 प्रतिशत तक प्रोत्साहन दिया जाएगा। मोबाइल फोन के प्रमुख कलपुर्जों और सब-असेंबली की घरेलू खरीद बढ़ाने पर कंपनियों को 1.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त इंसेंटिव मिलेगा। वहीं, भारतीय ब्रांड विकसित करने तथा उत्पाद डिजाइन और अनुसंधान पर निवेश करने वाली कंपनियों को पात्र बिक्री पर 3 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा।

सरकार के अनुसार वर्ष 2014-15 के बाद से देश में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण करीब सात गुना और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 11 गुना बढ़ चुका है। मोबाइल फोन इस वृद्धि का सबसे बड़ा आधार बनकर उभरे हैं। भारत वर्तमान में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता है और देश में इस्तेमाल होने वाले लगभग 99.2 प्रतिशत मोबाइल फोन यहीं बनाए जाते हैं।

वर्ष 2025 में स्मार्टफोन भारत का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद बनकर उभरा और उसने डीजल ईंधन तथा कटे-तराशे हीरों को भी पीछे छोड़ दिया। सरकार का मानना है कि 31 मार्च 2026 को समाप्त हुई मोबाइल PLI योजना से बनी गति को MPMS आगे बढ़ाएगी। इससे निवेश, रोजगार और निर्यात बढ़ने के साथ भारत की वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में स्थिति और मजबूत होगी।

Jitendra