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12वीं के बाद एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में बनाएं करियर, ISRO-DRDO समेत इन संस्थानों में मिल सकते हैं शानदार मौके

भारत में शुरुआती स्तर पर एयरोस्पेस इंजीनियरों का वार्षिक वेतन आमतौर पर 4 लाख से 8 लाख रुपये के बीच हो सकता है

Published: 09:00am, 05 Jul 2026

अगर आपका सपना हवाई जहाज, लड़ाकू विमान, रॉकेट, सैटेलाइट या अंतरिक्ष मिशनों पर काम करने का है, तो एयरोस्पेस इंजीनियरिंग आपके लिए बेहतरीन करियर विकल्प हो सकती है। भारत में अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्र के तेजी से विस्तार के साथ इस सेक्टर में प्रशिक्षित इंजीनियरों की मांग लगातार बढ़ रही है। सरकारी संस्थानों के अलावा निजी स्पेस और एयरोस्पेस कंपनियां भी योग्य उम्मीदवारों को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध करा रही हैं।

क्या होती है एयरोस्पेस इंजीनियरिंग?

एयरोस्पेस इंजीनियरिंग इंजीनियरिंग की वह शाखा है, जिसमें हवाई जहाज, हेलीकॉप्टर, ड्रोन, मिसाइल, रॉकेट, सैटेलाइट और अंतरिक्ष यानों का डिजाइन, निर्माण, परीक्षण और रखरखाव किया जाता है। इसे मुख्य रूप से दो भागों में बांटा जाता है। एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग के तहत पृथ्वी के वायुमंडल में उड़ने वाले विमानों और अन्य एयरक्राफ्ट से जुड़ी पढ़ाई कराई जाती है, जबकि एस्ट्रोनॉटिकल इंजीनियरिंग में रॉकेट, सैटेलाइट, अंतरिक्ष यान और स्पेस मिशनों से संबंधित तकनीकों का अध्ययन कराया जाता है।

12वीं के बाद कैसे करें एयरोस्पेस इंजीनियरिंग?

इस क्षेत्र में प्रवेश के लिए छात्रों का 12वीं कक्षा में भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित (PCM) विषयों के साथ उत्तीर्ण होना आवश्यक है। इसके बाद छात्र बीटेक या बीई इन एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, बीटेक इन एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग जैसे स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिला ले सकते हैं। उच्च शिक्षा के लिए एमटेक, पीएचडी और रिसर्च प्रोग्राम भी उपलब्ध हैं। देश के अधिकांश प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश जेईई मेन, जेईई एडवांस्ड या संबंधित विश्वविद्यालयों की प्रवेश परीक्षाओं के माध्यम से दिया जाता है।

एयरोस्पेस इंजीनियर का काम क्या होता है?

एयरोस्पेस इंजीनियर विमान और अंतरिक्ष यानों के डिजाइन और विकास से लेकर उनके परीक्षण और रखरखाव तक की जिम्मेदारी निभाते हैं। वे इंजन और प्रोपल्शन सिस्टम विकसित करते हैं, सैटेलाइट और स्पेस मिशनों के लिए तकनीकी समाधान तैयार करते हैं तथा विमानों की सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए परीक्षण करते हैं। इसके अलावा हल्के और मजबूत मटेरियल पर रिसर्च करना तथा ड्रोन और स्वायत्त उड़ान प्रणालियों का विकास भी उनके कार्यों का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।

कहां मिलते हैं करियर के अवसर?

एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उम्मीदवारों के लिए सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में रोजगार के अच्छे अवसर मौजूद हैं। ISRO, DRDO, Hindustan Aeronautics Limited (HAL), National Aerospace Laboratories (NAL), Boeing India, Airbus India, Tata Advanced Systems, Mahindra Aerospace, Skyroot Aerospace और Agnikul Cosmos जैसी संस्थाएं नियमित रूप से योग्य इंजीनियरों को अवसर प्रदान करती हैं। इसके अलावा रक्षा एवं विमानन उद्योग, ड्रोन टेक्नोलॉजी कंपनियों और अनुसंधान एवं विकास संस्थानों में भी करियर बनाया जा सकता है।

भारत के प्रमुख एयरोस्पेस इंजीनियरिंग कॉलेज

देश के कई प्रतिष्ठित संस्थान एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई कराते हैं। इनमें IIT मद्रास, IIT बॉम्बे, IIT कानपुर, IIT खड़गपुर, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी (IIST), तिरुवनंतपुरम, अन्ना यूनिवर्सिटी, चेन्नई, हिंदुस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस, चेन्नई तथा पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (PEC), चंडीगढ़ प्रमुख हैं।

कितनी मिलती है सैलरी?

भारत में शुरुआती स्तर पर एयरोस्पेस इंजीनियरों का वार्षिक वेतन आमतौर पर 4 लाख से 8 लाख रुपये के बीच हो सकता है। अनुभव और विशेषज्ञता बढ़ने के साथ यह 12 लाख रुपये या उससे अधिक तक पहुंच सकता है। वहीं ISRO, HAL, DRDO और वैश्विक एयरोस्पेस कंपनियों में बेहतर वेतन के साथ रिसर्च और करियर ग्रोथ के भी उत्कृष्ट अवसर उपलब्ध होते हैं।

YuvaSahakar Desk