देश में रोजगार की बढ़ती प्रतिस्पर्धा की तस्वीर नेशनल करियर सर्विस (NCS) पोर्टल के ताजा आंकड़ों से साफ झलक रही है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के तहत संचालित पोर्टल के अनुसार, महाराष्ट्र में सबसे अधिक 99.73 लाख और बिहार में 54.14 लाख युवा नौकरी की तलाश में पंजीकृत हैं। दोनों राज्य देश में क्रमशः पहले और दूसरे स्थान पर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंकड़े इन राज्यों में रोजगार की ऊंची मांग और अवसरों के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धा का संकेत देते हैं।
इसके बाद मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में 50-50 लाख पंजीकृत जॉब सीकर्स हैं। असम में 41.68 लाख, पश्चिम बंगाल में 38.99 लाख और कर्नाटक में 32.84 लाख युवाओं ने रोजगार के लिए पंजीकरण कराया है। बड़े राज्यों में युवाओं की आबादी अधिक होने के साथ-साथ सरकारी और निजी नौकरियों की बढ़ती प्रतिस्पर्धा भी इन आंकड़ों में दिखाई देती है।
केंद्र सरकार के अनुसार, NCS पोर्टल पर 6 करोड़ से अधिक जॉब सीकर्स और 54 लाख से अधिक नियोक्ता पंजीकृत हैं। यह पोर्टल सरकारी एवं निजी क्षेत्र की नौकरियों, अप्रेंटिसशिप, कौशल प्रशिक्षण और करियर काउंसलिंग जैसी सेवाओं को एक ही डिजिटल मंच पर उपलब्ध कराता है।
हालांकि, विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि NCS पर अधिक पंजीकरण का अर्थ सीधे-सीधे बेरोजगारी नहीं है। यह उन युवाओं की संख्या को दर्शाता है जो बेहतर रोजगार, करियर अवसर या कौशल विकास की तलाश में पोर्टल का उपयोग कर रहे हैं। फिर भी महाराष्ट्र और बिहार जैसे राज्यों में सबसे अधिक पंजीकरण यह संकेत देते हैं कि रोजगार की मांग उपलब्ध अवसरों की तुलना में कहीं अधिक है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि औद्योगिक निवेश, विनिर्माण क्षेत्र का विस्तार, एमएसएमई, स्टार्टअप और कौशल विकास कार्यक्रमों की गति नहीं बढ़ी, तो बड़े राज्यों में रोजगार की प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है। ऐसे में मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया मिशन, पीएम इंटर्नशिप योजना और डिजिटल भर्ती प्रणाली जैसी पहलें युवाओं को रोजगार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।


