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AI IT कंपनियों की जगह नहीं लेगा, बल्कि उन्हें और मजबूत बनाएगा: नंदन नीलेकणि

AI हमारी जैसी कंपनियों की जगह नहीं लेगा, बल्कि उन कंपनियों को और आगे बढ़ाएगा जो तेजी से बदलाव को अपनाती हैं

Published: 11:49am, 24 Jun 2026

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव के बीच नौकरियों और IT उद्योग के भविष्य को लेकर चल रही चिंताओं पर इंफोसिस के सह-संस्थापक और चेयरमैन नंदन नीलेकणि ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि AI IT कंपनियों की जगह नहीं लेगा, बल्कि उन्हें और अधिक सक्षम तथा प्रभावी बनाएगा। साथ ही उन्होंने भरोसा जताया कि इंफोसिस वर्ष 2030 तक 400 अरब डॉलर के AI-फर्स्ट सर्विसेज मार्केट का लाभ उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

इंफोसिस की 45वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में शेयरधारकों को संबोधित करते हुए नीलेकणि ने तकनीकी बदलावों के दौर में IT उद्योग के सामने खड़े अस्तित्व संबंधी सवालों पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि जेनरेटिव AI (Gen-AI) के लॉन्च होने के तीन साल से अधिक समय बाद भी इंफोसिस की प्रासंगिकता पहले से कहीं अधिक बढ़ी है और कंपनी आने वाले दशक के लिए मजबूत स्थिति में है।

उन्होंने कहा, “हम अत्याधुनिक कोडिंग टूल्स को अपना रहे हैं और अपनी उत्पादकता बढ़ा रहे हैं। हालांकि सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट लाइफ साइकिल में अभी भी बहुत काम किया जाना बाकी है। AI हमारी जैसी कंपनियों की जगह नहीं लेगा, बल्कि उन कंपनियों को और आगे बढ़ाएगा जो तेजी से बदलाव को अपनाती हैं।”

सिर्फ कोडिंग नहीं, पूरी बिजनेस समझ जरूरी

नीलेकणि ने कहा कि सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट केवल कोड लिखने तक सीमित नहीं है। बड़े एंटरप्राइज प्रोजेक्ट्स में बिजनेस की जरूरतों को समझना, मजबूत तकनीकी ढांचा तैयार करना, पुरानी और नई तकनीकों को जोड़ना, साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करना और डेटा गवर्नेंस को प्रभावी बनाना बेहद जरूरी होता है।

उन्होंने बताया कि एंटरप्राइज सॉल्यूशंस के लिए कड़ी टेस्टिंग, मजबूत आर्किटेक्चर, बुनियादी साइबर सुरक्षा और सख्त डेटा गवर्नेंस की आवश्यकता होती है। ऐसे महत्वपूर्ण कार्यों को पूरी तरह बाहरी AI प्लेटफॉर्म्स के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।

AI लागू करने में मौजूद हैं चुनौतियां

इंफोसिस चेयरमैन ने कहा कि बड़ी कंपनियों में AI को प्रभावी तरीके से लागू करने के रास्ते में अभी कई बाधाएं मौजूद हैं। इन चुनौतियों को समझना और उनका समाधान करना ही IT सेवा कंपनियों का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है।

उन्होंने कहा, “हमारे क्लाइंट एंटरप्राइज AI की जटिलताओं को समझने और उनसे निपटने में मदद के लिए इंफोसिस पर भरोसा करते हैं। बड़ी कंपनियों में AI को लागू करने और वास्तविक कारोबारी जरूरतों के बीच जो अंतर है, उसे पाटना ही हमारा असली काम है।”

AI क्रांति से बढ़ेगा आधुनिकीकरण का काम

नीलेकणि के अनुसार AI क्रांति ने पुराने और पारंपरिक सिस्टम्स के आधुनिकीकरण को पहले से कहीं अधिक जरूरी बना दिया है। यही बदलाव इंफोसिस जैसी कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा कर रहा है। आने वाले वर्षों में सबसे बड़ी ग्रोथ AI मॉडल्स को एंटरप्राइज प्लेटफॉर्म्स और बिजनेस प्रक्रियाओं के साथ एकीकृत करने से आएगी।

AI प्रोजेक्ट्स में इंफोसिस की मजबूत पकड़

AI के क्षेत्र में अपनी प्रगति का जिक्र करते हुए नीलेकणि ने बताया कि इंफोसिस अपने शीर्ष 200 ग्राहकों में से लगभग 90 प्रतिशत के साथ AI आधारित परियोजनाओं और प्रयोगों पर काम कर रही है। कंपनी ने हाल ही में अपना AI-First Value Framework भी लॉन्च किया है, जिसका उद्देश्य ग्राहकों को AI तकनीक का अधिकतम लाभ दिलाना है।

इंफोसिस का अनुमान है कि वर्ष 2030 तक AI-फर्स्ट सर्विसेज का वैश्विक बाजार 300 से 400 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। कंपनी इस अवसर का लाभ उठाने के लिए अपनी तकनीकी क्षमता, विशेषज्ञता और वैश्विक ग्राहक आधार को लगातार मजबूत कर रही है।

YuvaSahakar Desk