फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने 12 वर्षों बाद बीफार्मा (B.Pharm) पाठ्यक्रम में व्यापक बदलाव किए हैं। नए पाठ्यक्रम को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप तैयार किया गया है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग, डेटा एनालिटिक्स, डिजिटल हेल्थ, उद्यमिता, संचार कौशल और रोगी केंद्रित देखभाल जैसे आधुनिक विषयों को शामिल किया गया है। पीसीआई के अध्यक्ष मोंटू भाई पटेल के अनुसार, बदलते स्वास्थ्य क्षेत्र और डिजिटल तकनीकों की जरूरतों को देखते हुए यह बदलाव किए गए हैं ताकि छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया जा सके।
नए सिलेबस की खास बात यह है कि यदि कोई छात्र किसी सेमेस्टर में असफल हो जाता है, तो उसे पूरा सेमेस्टर दोबारा नहीं पढ़ना होगा। वह अगले सेमेस्टर में प्रवेश लेकर पढ़ाई जारी रख सकेगा, हालांकि उसे पिछली परीक्षा दोबारा उत्तीर्ण करनी होगी।
डिजिटल शिक्षा को पहले ही सेमेस्टर से पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है। छात्रों को पहले सेमेस्टर में पायथन प्रोग्रामिंग, दूसरे में बायोस्टैटिस्टिक्स और डेटा एनालिटिक्स, तीसरे में मशीन लर्निंग तथा आगे के सेमेस्टरों में एआई के अनुप्रयोग, क्लिनिकल उपयोग और एआई से जुड़े नैतिक पहलुओं की शिक्षा दी जाएगी।
नए पाठ्यक्रम में छात्रों को अपनी रुचि के अनुसार विषय चुनने की भी स्वतंत्रता मिलेगी। ग्रीन केमिस्ट्री, मेडिकल डिवाइस, साइंटिफिक राइटिंग, ड्रग स्टोर मैनेजमेंट, कंप्यूटर एडेड ड्रग डिजाइन और प्रोफेशनल स्किल्स जैसे विषय वैकल्पिक रूप से उपलब्ध होंगे।
इसके अलावा, छात्रों के लिए न्यूनतम 240 घंटे की इंटर्नशिप अनिवार्य की गई है। सातवें और आठवें सेमेस्टर में रिसर्च प्रोजेक्ट भी करना होगा। नई च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (CBCS) के तहत बीफार्म डिग्री प्राप्त करने के लिए 193 क्रेडिट अर्जित करना आवश्यक होगा। साथ ही, 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य होगी और निरंतर मूल्यांकन के आधार पर अंतिम परिणाम तैयार किया जाएगा। नए सिलेबस में नवाचार, स्टार्टअप और उद्यमिता को भी विशेष महत्व दिया गया है।


