भारत में बीएड करने वाले युवाओं के लिए ऑस्ट्रेलिया में शिक्षक बनने का रास्ता खुला हुआ है। बड़ी संख्या में ऐसे युवा हैं, जिन्होंने बीएड की पढ़ाई तो पूरी कर ली, लेकिन उन्हें मनचाही नौकरी नहीं मिल पाई। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया में शिक्षक के तौर पर करियर बनाना एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है। हालांकि इसके लिए कुछ जरूरी प्रक्रियाओं को पूरा करना होता है।
ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाने से पहले भारतीय शिक्षकों को अपनी शैक्षणिक योग्यता का मूल्यांकन करवाना पड़ता है। यह काम ऑस्ट्रेलियन इंस्टीट्यूट फॉर टीचिंग एंड स्कूल लीडरशिप करता है। उम्मीदवारों को अपनी बीएड डिग्री, शैक्षणिक प्रमाणपत्र और टीचिंग प्रैक्टिस से जुड़े दस्तावेज जमा करने होते हैं। संस्था यह जांचती है कि भारतीय डिग्री ऑस्ट्रेलिया के शिक्षण मानकों के बराबर है या नहीं।
इसके साथ ही अंग्रेजी भाषा की परीक्षा पास करना भी जरूरी होता है। आमतौर पर अभ्यर्थियों को IELTS परीक्षा में अच्छा स्कोर हासिल करना पड़ता है। रीडिंग और राइटिंग में कम से कम 7 बैंड तथा स्पीकिंग में 8 बैंड स्कोर जरूरी माना जाता है।
योग्यता मान्य होने के बाद संबंधित राज्य में शिक्षक पंजीकरण करवाना होता है। हर राज्य की अपनी अलग शिक्षण संस्था और नियम हैं। उदाहरण के तौर पर न्यू साउथ वेल्स में पढ़ाने के लिए वहां की शिक्षा मानक संस्था से अनुमति लेनी होती है।
ऑस्ट्रेलिया में नौकरी के लिए वैध वीजा भी जरूरी है। शिक्षक स्किल्ड माइग्रेशन वीजा या स्पॉन्सरशिप वीजा के जरिए वहां काम कर सकते हैं। कई स्कूल विदेशी शिक्षकों को नौकरी देकर वीजा स्पॉन्सर भी करते हैं।
वहीं वेतन की बात करें तो ऑस्ट्रेलिया में प्राइमरी और सेकेंडरी स्कूल शिक्षकों की औसतन सालाना सैलरी करीब 70 लाख रुपये तक बताई जाती है। इसी वजह से बड़ी संख्या में भारतीय युवा अब ऑस्ट्रेलिया में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे हैं।


