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सहकारिता से आत्मनिर्भर बनेगा भारत

अगर अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है तो हमें गांव, गरीब, किसान, मजदूर, कृषि और जंगल के क्षेत्र को समृद्ध करना होगा। अगर गांवों का उद्धार करना है तो सहकारिता की प्राथमिकता में किसानों को रखना होगा। यह कठिन है, लेकिन असंभव नहीं है।

Published: 14:57pm, 06 Jan 2025

– सहकार भारती का आठवां राष्ट्रीय अधिवेशन अमृतसर में हुआ संपन्न

– सहकारिता को आत्मसात करने वाले राज्य कर रहे हैं तरक्की- राज्यपाल

सहकारिता भारतीय जीवन संस्कृति का आधार रही है। देश की ग्रामीण व्यवस्था सहकारिता आधारित थी। यहां के लोग जीवन को सहकारिता के आधार पर जीने के अभ्यस्त थे। मगर बदलते समय के साथ सहकार की भावना में कमी आती चली गई। वर्तमान परिदृश्य में सहकारिता आंदोलन को दोबारा खड़ा करने की जरूरत है। भारत सही मायने में आत्मनिर्भर तभी बन सकेगा जब सहकारिता को लोग अपनी दिनचर्या में शामिल करेंगे। पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने सहकार भारती के आठवें राष्ट्रीय अधिवेशन के उद्घाटन सत्र में सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने पर जोर देते हुए यह बातें कही।

पंजाब के अमृतसर में 6-8 दिसंबर तक आयोजित इस अधिवेशन में 26 सूत्री चार प्रस्ताव पास किए गए। इन प्रस्तावों के आधार पर सहकार भारती की आगे की कार्ययोजना बनाई जाएगी। पहला प्रस्ताव सहकारी क्षेत्र में कानूनों का आधुनिकीकरण तथा सहकारी समितियों को आर्थिक उद्यम के रूप में स्वतंत्रापूर्वक कार्य करने में सक्षम बनाने पर केन्द्रित था। दूसरा प्रस्ताव सहकारी आंदोलन के विकास के लिए प्रशिक्षण, शिक्षा और जागरूकता रहा। इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार के प्रति अभिनंदन प्रस्ताव भी पारित हुआ। चौथे प्रस्ताव के रूप में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए सहकारी समितियों को सशक्त बनाने से संबंधित रहा।

अधिवेशन को संबोधित करते हुए गुलाब चंद कटारिया ने कहा, ‘अच्छे संस्कारों के बगैर मजबूत सहकार संभव नहीं है। वर्तमान समाज को सहकारिता से जोड़ना जरूरी है। जिन राज्यों ने सहकारिता को आत्मसात किया वह आज तरक्की पर है। सहकारिता में जिन लोगों ने भ्रष्टाचार और परिवारवाद को बढ़ावा दिया उन्हीं लोगों ने सहकारिता का बंटाधार किया। ऐसे समय में सहकार भारती ही इसका उद्धार कर सकती है।’ गुजरात का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि गुजरात में तरक्की का आधार सहकारिता ही है। पंजाब में सहकारिता की अपार संभावनाएं हैं। यहां इस क्षेत्र में कार्य करने की बहुत जरूरत है। यहां के प्रत्येक शहर और गांव में ऐसे लोगों को जोड़ना होगा जो अपने साथ सहकारिता की चेन बनाकर इसे आगे बढ़ा सकें।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने इस मौके पर कहा कि भारत में आजादी के समय से ही सहकारिता आंदोलन की भूमिका अहम रही है। वर्तमान में हम सभी को मिलकर प्रयास करना चाहिए कि सहकारिता की सीमा भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व तक होनी चाहिए। आज हम आर्थिक विकास तो कर रहे हैं लेकिन सामाजिक विकास की तरफ किसी का ध्यान नहीं है। सामाजिक विकास के लिए पूरे देश में परिवर्तन की लहर चलाने की जरूरत है। भारतीय संविधान में स्वतंत्रता, समानता, संयमता और न्याय की बात कही गई है। यह कहीं न कहीं पिछड़ रहा है। सही मायने में सहकारिता का अर्थ बेहतर कुटुंब, जनमानस और राष्ट्र का निर्माण करना है जिसमें एक-दूसरे के प्रति संवेदनाएं हों। आज एक-दूसरे के प्रति सामाजिक संवेदनाएं समाप्त होती जा रही हैं। इस तरफ ध्यान दिए जाने की जरूरत है।

अधिवेशन के समापन मौके पर केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद रहे। अधिवेशन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि देश की तरक्की के लिए गांवों के किसान-मजदूरों को समृद्ध करना जरूरी है। देश की उन्नति में 12-14 प्रतिशत हिस्सेदारी खेतीबाड़ी व इससे जुड़े उद्योगों की है। स्वाधीनता आंदोलन की शुरूआत में 90 फीसदी आबादी गांवों में रहती थी, लेकिन अब 30 फीसदी आबादी गांवों से निकल कर बड़े शहरों में चली गई है। बड़े शहरों में लोग झोपड़-पट्टी में रहने को मजबूर हैं। किसानों व मजदूरों की हालत अच्छी नहीं है। अगर अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है तो हमें गांव, गरीब, किसान, मजदूर, कृषि और जंगल के क्षेत्र को समृद्ध करना होगा। अगर गांवों का उद्धार करना है तो सहकारिता की प्राथमिकता में किसानों को रखना होगा। यह कठिन है, लेकिन असंभव नहीं है। हमारा किसान अब सिर्फ अन्नदाता नहीं रहा। वह अब ऊर्जा दाता और ईंधन दाता है। सहकार भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष दीनानाथ ठाकुर ने कहा कि 2021 में जब सहकारिता मंत्रालय की स्थापना हुई तो देश में सहकारिता के प्रति एक नई चेतना का निर्माण हुआ। इस बात के लिए हम सभी को गौरवान्वित होना चाहिए कि इसके लिए सबसे अधिक योगदान सहकार भारती का रहा है।

सहकारिता क्षेत्र का जाना-माना चेहरा डॉ. उदय जोशी को अधिवेशन में सर्वसम्मति से संगठन का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। वह दीनानाथ ठाकुर की जगह लेंगे। उनका कार्यकाल तीन वर्ष का होगा। डॉ. जोशी इससे पहले संगठन के राष्ट्रीय महामंत्री थे। राष्ट्रीय महामंत्री के रूप में अब दीपक चौरसिया को संगठन में जगह दी गई है। चौरसिया करीब 18 साल से सहकार भारती से जुड़े हैं। इसी अधिवेशन में इफको के एमडी डॉ. उदय शंकर अवस्थी को ‘फर्टिलाइजर मैन ऑफ इंडिया’ के सम्मान से सम्मानित किया गया।

YuvaSahakar Team

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