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नक्सलवाद के अंत के बाद विकास का महायज्ञ: सीएम साय ने पीएम मोदी को सौंपा बस्तर 2.0 का ब्लूप्रिंट

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर नक्सलवाद से मुक्त बस्तर के समग्र विकास का विस्तृत ब्लूप्रिंट प्रस्तुत किया। इस योजना में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, पर्यटन, स्टार्टअप और रोजगार से जुड़ी कई बड़ी परियोजनाएं शामिल हैं, जिनका उद्देश्य बस्तर को शांति, विकास और अवसरों के नए दौर में ले जाना है।

Published: 15:37pm, 08 Apr 2026

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय (Vishnu Deo Sai) ने मंगलवार को देश की राजधानी नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री (CM Vishnu Deo Sai( ने बस्तर के भविष्य को बदलने वाली एक व्यापक और दूरदर्शी कार्ययोजना प्रधानमंत्री के समक्ष रखी। बैठक में केवल समस्याओं पर चर्चा नहीं हुई, बल्कि उन समस्याओं के समाधान और आने वाले दो दशकों के विकास का पूरा ‘ब्लूप्रिंट’ (Bastar 2.0) प्रस्तुत किया गया। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को अवगत कराया कि केंद्र और राज्य सरकार के साझा प्रयासों से आज बस्तर समेत पूरा छत्तीसगढ़ नक्सलवाद (Naxal Free Chhattisgarh) के काले साये से बाहर निकल चुका है।

प्रधानमंत्री का सपना और बस्तर की नई वास्तविकता

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री को बताया कि एक दशक पहले जब श्री नरेंद्र मोदी ने बस्तर के लिए शांति और विकास का सपना देखा था, तब वह एक कठिन चुनौती जैसा लगता था। लेकिन आज, बस्तर की सड़कों पर डर की जगह उम्मीदों की चमक दिखाई देती है। नक्सलवाद के खात्मे के बाद अब प्रदेश में स्थायी शांति स्थापित हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके निरंतर मार्गदर्शन ने छत्तीसगढ़ को एक नई दिशा प्रदान की है। अब समय आ गया है कि बस्तर को विकास की दौड़ में देश के अग्रणी जिलों के समकक्ष खड़ा किया जाए।

‘बस्तर मुन्ने’ (Bastar 2.0) कार्यक्रम: प्रशासन अब जनता के द्वार

मुख्यमंत्री ने ‘बस्तर मुन्ने’ (Bastar 2.0) कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह पहल बस्तर की तस्वीर बदल देगी। इस कार्यक्रम के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में विशेष शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों की खासियत यह होगी कि यहाँ जिले के बड़े अधिकारी स्वयं मौजूद रहेंगे। लोगों को अपनी छोटी-छोटी जरूरतों जैसे राशन कार्ड, आधार कार्ड, किसान किताब या किसी अन्य प्रमाण पत्र के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। दस्तावेज वहीं मौके पर तैयार किए जाएंगे और शिकायतों का त्वरित समाधान होगा। यह सुशासन का एक ऐसा मॉडल है जो सीधे बस्तर के सुदूर वनांचलों तक सरकार की पहुंच सुनिश्चित करेगा।

कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे का सुदृढ़ीकरण

बस्तर के विकास के लिए कनेक्टिविटी को मुख्यमंत्री ने अपनी कार्ययोजना में सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तुत ‘सैचुरेशन, कनेक्ट, फैसिलिटेट, एम्पावर और एंगेज’ रणनीति के तहत सड़कों के जाल को और अधिक विस्तृत किया जाएगा। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत जो कार्य पिछले वर्षों में नक्सल बाधा के कारण अधूरे रह गए थे, उन्हें 2027 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही 228 नई सड़कों और 267 पुलों के निर्माण का प्रस्ताव रखा गया है। हवाई सेवाओं की बात करें तो जगदलपुर एयरपोर्ट के विस्तार और रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन को शीघ्र पूर्ण करने की दिशा में कार्य तेज किया जा रहा है, जिससे बस्तर सीधे देश के आर्थिक केंद्रों से जुड़ सके।

आर्थिक उन्नति: 2029 तक आय दोगुनी करने का लक्ष्य

बस्तर के आदिवासियों और ग्रामीणों की आय बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री ने एक तीन वर्षीय विशेष योजना का खाका पेश किया है। इस योजना का लक्ष्य वर्ष 2029 तक क्षेत्र के 85% परिवारों की मासिक आय को 15,000 रुपये से बढ़ाकर न्यूनतम 30,000 रुपये करना है। इसके लिए कृषि, लघु वनोपज और स्वरोजगार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ‘नियद नेल्ला नार 2.0’ योजना का विस्तार अब गरियाबंद, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जैसे नए जिलों में भी किया जा रहा है। यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ साबित होगी।

सिंचाई और कृषि में क्रांतिकारी सुधार

कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को संबल देने के लिए इंद्रावती नदी पर दो महत्वाकांक्षी परियोजनाओं देउरगांव और मटनार प्रोजेक्ट को स्वीकृति प्रदान की गई है। इन परियोजनाओं के माध्यम से बस्तर के 31,840 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे न केवल धान, बल्कि अन्य नकदी फसलों की पैदावार भी बढ़ेगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से बस्तर का किसान अब स्वावलंबी बनेगा। इसके अलावा, क्षेत्र में सौर ऊर्जा और हर घर बिजली पहुंचाने के कार्य को भी नई गति दी जा रही है।

शिक्षा और स्वास्थ्य: भविष्य की तैयारी

शिक्षा के क्षेत्र में बस्तर को सशक्त बनाने के लिए 45 ‘पोटा केबिन’ स्कूलों को स्थायी और भव्य भवनों में तब्दील किया जाएगा। जगरगुंडा और ओरछा जैसे दुर्गम इलाकों में ‘एजुकेशन सिटी’ का निर्माण किया जा रहा है, जो बस्तर के बच्चों को आधुनिक शिक्षा प्रदान करेगी। स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए जगदलपुर में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और दंतेवाड़ा में नए मेडिकल कॉलेज के निर्माण को प्राथमिकता दी गई है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का विस्तार किया जा रहा है ताकि सुदूर अंचलों में भी विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।

पर्यटन और कौशल विकास: बस्तर की नई पहचान

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को जानकारी दी कि बस्तर को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए चित्रकोट, तीरथगढ़ और कांगेर घाटी नेशनल पार्क में अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। एडवेंचर टूरिज्म, कैनोपी वॉक और ग्लास ब्रिज जैसी परियोजनाएं पर्यटकों को आकर्षित करेंगी। इसके साथ ही ‘बस्तर ओलंपिक’ और ‘बस्तर पंडुम’ जैसे आयोजनों के माध्यम से स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा दिया जा रहा है। रोजगार के मोर्चे पर, 1 लाख से अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिसमें से 40 हजार युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार प्राप्त हुआ है। ‘अंजोर विजन 2047’ के तहत 2030 तक 5,000 नए स्टार्टअप तैयार करने का लक्ष्य भी रखा गया है।

प्रधानमंत्री को दिया छत्तीसगढ़ आने का न्यौता:

मुलाकात के अंत में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मानसून के बाद बस्तर प्रवास का आमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि उनकी उपस्थिति में रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और दंतेवाड़ा मेडिकल कॉलेज जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण संपन्न हो। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री के इस ऐतिहासिक दौरे से बस्तर की जनता में नया उत्साह जगेगा और क्षेत्र विकास की नई ऊंचाइयों को छुएगा।

YuvaSahakar Desk