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सहकार से समृद्धि: 1 लाख करोड़ रुपये के पार हुआ Amul का टर्नओवर

अमूल अब अपनी पहुंच को वैश्विक स्तर पर और अधिक विस्तारित करने की दिशा में भी कार्य कर रहा है। कंपनी ने यूरोप और अमेरिका जैसे बाजारों में भी ताजा दूध और अन्य डेयरी उत्पादों की बिक्री शुरू की है।इस पहल का उद्देश्य अमूल को एक वैश्विक डेयरी ब्रांड के रूप में स्थापित करना और भारतीय डेयरी उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान दिलाना है। इससे भारत को वैश्विक डेयरी उद्योग में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने में मदद मिल सकती है।

Published: 15:58pm, 06 Apr 2026

भारत के डेयरी क्षेत्र की अग्रणी ब्रांड Amul ने वित्त वर्ष 2025-26 में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए अपने ब्रांड कारोबार को 1 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचा दिया है। गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (GCMMF), जो अमूल ब्रांड का संचालन करती है, ने इस वर्ष अपने कारोबार में 11 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में अमूल का ब्रांड टर्नओवर लगभग 90,000 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर एक लाख करोड़ के पार जा पहुंचा है। वहीं, अगर फेडरेशन की कुल बिक्री की बात करें, तो यह 65,911 करोड़ रुपये से बढ़कर 73,450 करोड़ रुपये हो गई है, जो सीधे तौर पर 11.4 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। इस विशाल राजस्व के साथ अमूल अब भारत की अग्रणी FMCG (Fast Moving Consumer Goods) कंपनियों की सूची में शीर्ष पर काबिज हो गया है।

1200 उत्पादों का विशाल साम्राज्य और मजबूत नेटवर्क

अमूल की इस सफलता के पीछे उसकी विविधता और उपभोक्ता की नब्ज पहचानने की क्षमता है। वर्तमान में अमूल के पोर्टफोलियो में दूध, मक्खन, घी, पनीर, दही और आइसक्रीम सहित 1200 से अधिक उत्पाद शामिल हैं। कंपनी ने समय के साथ बदलते बाजार और उपभोक्ताओं की मांग के अनुरूप खुद को ढाला है। छोटे गांवों की संकरी गलियों से लेकर महानगरों के सुपरमार्केट तक, अमूल का वितरण तंत्र (Distribution Network) बेजोड़ है। तकनीक के समावेश ने इस नेटवर्क को और भी पारदर्शी और कुशल बनाया है।

किसानों का सशक्तिकरण: मुनाफे के असली हकदार

अमूल मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता इसका ‘किसान-केंद्रित’ होना है। फेडरेशन के चेयरमैन अशोकभाई चौधरी के अनुसार, इस 1 लाख करोड़ के टर्नओवर का सीधा लाभ उन 36 लाख किसानों को मिलता है, जो प्रतिदिन दूध का उत्पादन करते हैं। यह एक ऐसा आत्मनिर्भर आर्थिक ढांचा है, जहां बिचौलियों की कोई जगह नहीं है और मुनाफे का बड़ा हिस्सा सीधे उत्पादकों (किसानों) की जेब में जाता है। यह मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने का सबसे सशक्त माध्यम बनकर उभरा है।

वैश्विक पटल पर ‘द टेस्ट ऑफ इंडिया’

अमूल अब अपनी सीमाओं का विस्तार कर रहा है। हाल ही में कंपनी ने यूरोप और अमेरिका के बाजारों में अपने ताजे दूध की आपूर्ति शुरू कर दी है। अमूल के प्रबंध निदेशक डॉ. जयेन मेहता ने कहा कि हमारा उद्देश्य अमूल को एक वैश्विक ब्रांड बनाना है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय डेयरी उत्पादों की पहुंच न केवल देश का गौरव बढ़ाएगी, बल्कि वैश्विक व्यापार का लाभ सीधे हमारे छोटे किसानों तक पहुंचाएगी।

सरकार का सहयोग और दूसरी श्वेत क्रांति का संकल्प

सहकारिता के इस मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तारित करने के लिए भारत सरकार भी निरंतर प्रयासरत है। इसी दिशा में जुलाई 2025 में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा सरदार पटेल कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड (SPCDF) की शुरुआत की गई। इसका मुख्य लक्ष्य गुजरात के सफल मॉडल को देश के अन्य राज्यों के गांवों तक पहुंचाना है।

GCMMF के प्रबंध निदेशक Jayan Mehta के अनुसार संस्था केवल अपने कारोबार का विस्तार ही नहीं कर रही है, बल्कि यह भी सुनिश्चित कर रही है कि तकनीक और वैश्विक व्यापार का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, बेहतर सप्लाई चेन और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित की जा रही है।

YuvaSahakar Desk

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