बिहार सरकार राज्य में सहकारिता आंदोलन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के लिए बड़े नीतिगत बदलाव करने जा रही है। सहकारिता विभाग के माध्यम से राज्य की सभी सहकारी समितियों को अब स्टार्टअप के रूप में प्रोत्साहित किया जाएगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य समितियों को आत्मनिर्भर बनाना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित करना है।
9,000 समितियों को मिलेगा ऋण का लाभ
योजना के प्रथम चरण में राज्य की 9,000 चयनित सहकारी समितियों को ‘बिहार स्टेट कोआपरेटिव बैंक’ के माध्यम से सुलभ ऋण (Loan) उपलब्ध कराने की तैयारी पूरी कर ली गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऋण वितरण में पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता दी जाएगी। यह सुविधा मुख्य रूप से उन समितियों को मिलेगी जिनका लेखा-जोखा और ऑडिट रिपोर्ट पूरी तरह अद्यतन (Up-to-date) होगी। विभाग ने अब सभी सहकारी समितियों के लिए वार्षिक ऑडिट अनिवार्य कर दिया है, जिसकी रिपोर्ट सीधे मुख्यालय को प्रेषित की जाएगी।
पूंजी निर्माण और पैक्स का सुदृढ़ीकरण
सहकारिता विभाग अब समितियों को केवल पारंपरिक कार्यों तक सीमित न रखकर उन्हें बहुद्देश्यीय गतिविधियों से जोड़ रहा है। विभाग का मानना है कि जब तक समितियों के पास पर्याप्त कार्यशील पूंजी (Working Capital) नहीं होगी, तब तक उनका विस्तार संभव नहीं है। इसी को ध्यान में रखते हुए, प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) के एक शेयर की कीमत वर्तमान 10 रुपये से बढ़ाकर 1,000 रुपये करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। शेयर मूल्य में इस वृद्धि से पैक्स की अपनी पूंजी बढ़ेगी, जिससे वे बड़े स्तर पर व्यापारिक गतिविधियों का संचालन कर सकेंगी।
तकनीकी नवाचार और बुनियादी ढांचा
आधुनिक युग की जरूरतों को देखते हुए, कृषि उत्पादों की सुगम बिक्री के लिए एक साझा ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म विकसित किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक पैक्स की अपनी आधिकारिक वेबसाइट होगी, जिससे उनके कार्यों में डिजिटल पारदर्शिता आएगी। बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए प्रखंड स्तर पर ‘सहकारिता भवन’ और आधुनिक कार्यालयों की स्थापना की जाएगी। साथ ही, घाटे में चल रही या ‘बीमार’ सहकारी समितियों को पुनर्जीवित करने के लिए एक विशेष सहायता कोष (Corpus Fund) भी स्थापित किया जाएगा।


