राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा सोमवार को जारी पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, देश में बेरोजगारी दर में सुधार दर्ज किया गया है। फरवरी 2026 में बेरोजगारी दर घटकर 4.9 प्रतिशत हो गई है, जो जनवरी 2026 में 5 प्रतिशत थी। यह सर्वेक्षण व्यापक स्तर पर आयोजित किया गया था, जिसमें देश भर के लगभग 3.75 लाख उत्तरदाताओं से प्राप्त डेटा का विश्लेषण किया गया है।
ग्रामीण क्षेत्र में स्थिरता और मौसमी रिकवरी
विश्लेषण से पता चलता है कि ग्रामीण भारत में रोजगार की स्थिति विशेष रूप से स्थिर बनी हुई है। फरवरी माह में ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 4.2 प्रतिशत पर दर्ज की गई, जो पिछले महीने के समान ही है। उल्लेखनीय है कि दिसंबर 2025 में बेरोजगारी दर 4.8 प्रतिशत थी, जो जनवरी में मौसमी कारकों और फसल कटाई के बाद के अंतराल के कारण बढ़कर 5 प्रतिशत हो गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि फरवरी के आंकड़े दर्शाते हैं कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था अब मौसमी उतार-चढ़ाव से उबरकर पुनः पटरी पर लौट आई है।
महिला श्रम बल भागीदारी में ऐतिहासिक वृद्धि
इस रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक सक्रियता है। आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं की ‘श्रम बल भागीदारी दर’ (LFPR) में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। जनवरी में यह दर 39.7 प्रतिशत थी, जो फरवरी में बढ़कर 40.0 प्रतिशत हो गई है। यह बदलाव इंगित करता है कि ग्रामीण महिलाएं अब पारंपरिक घरेलू भूमिकाओं से बाहर निकलकर औपचारिक और अनौपचारिक श्रम बाजार में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर भी महिलाओं की बेरोजगारी दर में भारी गिरावट देखी गई है। जनवरी में महिलाओं की बेरोजगारी दर जहाँ 5.6 प्रतिशत थी, वहीं फरवरी में यह गिरकर 5.1 प्रतिशत पर आ गई है, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक शुभ संकेत है।
कार्यबल के अन्य प्रमुख सूचकांक
ग्रामीण क्षेत्रों में कुल श्रम बल भागीदारी दर फरवरी 2026 में 58.7 प्रतिशत रही है, जो रोजगार के प्रति निरंतर स्थिरता को दर्शाती है। वहीं, वर्कर पॉपुलेशन रेशियो, जो कुल आबादी में कार्यरत व्यक्तियों का अनुपात दर्शाता है, फरवरी में 56.3 प्रतिशत दर्ज किया गया है।


