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मिडिल ईस्ट संकट के बीच देश में गैस किल्लत, सरकार ने प्राकृतिक गैस आपूर्ति का कोटा किया निर्धारित

नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने रेस्टोरेंट्स को गैस पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक उपाय अपनाने की सलाह दी है

Published: 11:50am, 11 Mar 2026

ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और होर्मुज स्ट्रेट मार्ग के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है। समुद्री यातायात प्रभावित होने के बाद भारत में गैस आपूर्ति को लेकर चिंताएं तेज हो गई हैं। इसी को देखते हुए केंद्र सरकार ने प्राकृतिक गैस (आपूर्ति विनियमन) आदेश, 2026 जारी किया है, ताकि देश में प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को गैस की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने यह आदेश आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत जारी किया है। इसका उद्देश्य घरेलू रसोई गैस, वाहनों में इस्तेमाल होने वाली सीएनजी और उर्वरक उत्पादन जैसे जरूरी क्षेत्रों में गैस की सप्लाई स्थिर बनाए रखना है।

घरेलू गैस और CNG को पहली प्राथमिकता

नई व्यवस्था के तहत पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG), परिवहन क्षेत्र के लिए CNG और एलपीजी उत्पादन को प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रखा गया है। इन क्षेत्रों को पिछले छह महीनों की औसत खपत के आधार पर 100 प्रतिशत गैस आपूर्ति देने का प्रावधान किया गया है, ताकि घरेलू रसोई और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर असर न पड़े।

उर्वरक क्षेत्र को दूसरी प्राथमिकता

सरकार ने उर्वरक उद्योग को प्राथमिकता सूची में दूसरे स्थान पर रखा है। उर्वरक संयंत्रों को पिछले छह महीनों की औसत खपत का कम से कम 70 प्रतिशत गैस उपलब्ध कराई जाएगी।

उद्योगों को सीमित आपूर्ति

तीसरी प्राथमिकता में चाय प्रसंस्करण, मैन्युफैक्चरिंग और राष्ट्रीय गैस ग्रिड से जुड़े अन्य औद्योगिक क्षेत्र रखे गए हैं, जिन्हें उपलब्धता के आधार पर करीब 80 प्रतिशत गैस दी जाएगी। वहीं औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को गैस उपलब्ध कराने वाले सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को चौथे स्थान पर रखा गया है।

सरकार ने साफ किया है कि प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को गैस उपलब्ध कराने के लिए पेट्रोकेमिकल संयंत्रों, बिजली घरों और अधिक गैस खपत करने वाले उद्योगों को मिलने वाली गैस में कटौती की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर बिजली संयंत्रों और रिफाइनरियों की गैस आपूर्ति भी घटाई जा सकती है।

भारत की गैस खपत और आयात

भारत में प्राकृतिक गैस की कुल खपत करीब 191 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन है। इसमें लगभग आधी मांग घरेलू उत्पादन से पूरी होती है, जबकि बाकी जरूरत एलएनजी आयात से पूरी की जाती है। होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही कम होने और टैंकर बीमा प्रीमियम बढ़ने से वैश्विक गैस आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है।

होटल और रेस्तरां पर असर

गैस आपूर्ति संकट का असर देश के हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में भी दिखाई देने लगा है। कई शहरों में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कमी की शिकायतें सामने आई हैं। होटल और रेस्तरां संगठनों के मुताबिक मुंबई, पुणे, नागपुर और छत्रपति संभाजीनगर में गैस की कमी गंभीर हो गई है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार मुंबई में करीब 20 प्रतिशत होटल अस्थायी रूप से बंद हो चुके हैं और स्थिति नहीं सुधरी तो आधे से ज्यादा होटल प्रभावित हो सकते हैं।

दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे महानगरों में भी कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति अनियमित बताई जा रही है। कई डीलरों का कहना है कि घरेलू 14.2 किलोग्राम सिलेंडर फिलहाल उपलब्ध हैं, लेकिन कमर्शियल सिलेंडरों की भारी कमी है।

वैकल्पिक ऊर्जा अपनाने की सलाह

नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने रेस्तरां संचालकों को गैस पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक उपाय अपनाने की सलाह दी है। एसोसिएशन ने इंडक्शन कुकटॉप, इलेक्ट्रिक ग्रिल, कॉम्बी ओवन और इलेक्ट्रिक राइस कुकर जैसे उपकरणों के इस्तेमाल की सिफारिश की है।

मेस और हॉस्टल फीस बढ़ने की आशंका

गैस की कमी का असर अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ने लगा है। कुछ शहरों में पीजी और हॉस्टल संचालकों ने सिलेंडर की कमी के कारण मेस फीस बढ़ाने की संभावना जताई है।

सरकार ने इस बीच तेल कंपनियों और रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने और आपूर्ति स्थिर रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं और जरूरी सेवाओं पर संकट का असर कम किया जा सके।

YuvaSahakar Desk

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