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5 फरवरी को दिल्ली में ‘भारत टैक्सी’ का औपचारिक शुभारंभ किया गया था। दो माह के सफल पायलट संचालन के उपरांत इसे दिल्ली-एनसीआर और गुजरात में प्रारंभ किया गया है। सरकार की योजना है कि आगामी दो वर्षों में इस सेवा का विस्तार सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों तक किया जाएगा।

Published: 15:20pm, 23 Feb 2026

केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को ‘भारत टैक्सी’ के ड्राइवरों के साथ एक महत्वपूर्ण संवाद सत्र आयोजित किया। इस दौरान उन्होंने भारत के पहले सहकारी-आधारित (Cooperative-based) राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म के दूरगामी लक्ष्यों और ड्राइवरों के आर्थिक सशक्तिकरण की रूपरेखा साझा की। ज्ञात हो कि अमित शाह ने 5 फरवरी को दिल्ली में ‘भारत टैक्सी’ को औपचारिक रूप से लॉन्च किया था, जो दो महीने के सफल पायलट प्रोजेक्ट के बाद अब पूर्ण परिचालन में है।

बिचौलियों का अंत, ड्राइवरों का उदय

टैक्सी ड्राइवरों को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने निजी एग्रीगेटर्स (जैसे Uber और Ola) की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “अब तक का कॉन्सेप्ट यह था कि मेहनत ड्राइवर करता था, लेकिन मोटा मुनाफा विदेशी निवेश वाली कंपनियों के मालिकों की जेब में जाता था। निजी कंपनियां आपकी मेहनत की कमाई का 30 प्रतिशत तक कमीशन के रूप में काट लेती थीं। ‘भारत टैक्सी’ लाने का हमारा मूल उद्देश्य इस व्यवस्था को बदलना है। यहाँ उद्देश्य मालिकों को अमीर बनाना ही है, लेकिन फर्क सिर्फ इतना है कि यहाँ ड्राइवर ही असली मालिक हैं।”

मात्र 500 रुपये का निवेश और मालिकाना हक

अमित शाह ने प्लेटफॉर्म से जुड़ने की सरल प्रक्रिया और इसके पारदर्शी आर्थिक मॉडल का खाका पेश किया। उन्होंने बताया कि इस क्रांतिकारी मॉडल का हिस्सा बनने के लिए ड्राइवरों को केवल 500 रुपये का निवेश करना होगा। यह निवेश उन्हें ‘भारत टैक्सी’ सहकारी समिति का सदस्य और हिस्सेदार बनाता है।

मुनाफे के वितरण का अनोखा फॉर्मूला

मंत्री ने ड्राइवरों को भविष्य के आर्थिक लाभ समझाते हुए ’80:20′ का फॉर्मूला दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ड्राइवरों को तत्काल रूप से निश्चित किराया तो मिलेगा ही, लेकिन असली लाभ तीन साल के धैर्य के बाद शुरू होगा। शाह ने उदाहरण देते हुए समझाया, “मान लीजिए तीन साल बाद भारत टैक्सी 25 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाती है, तो इसका 20 प्रतिशत (5 करोड़ रुपये) आपकी पूंजी के रूप में सहकारी समिति के खाते में सुरक्षित रहेगा। शेष 80 प्रतिशत लाभ सीधे उन ड्राइवरों के खातों में वापस जमा किया जाएगा, जिन्होंने जितने किलोमीटर टैक्सी चलाई है। यानी जितना अधिक श्रम, उतना अधिक मुनाफा।”

विदेशी कंपनियों को स्वदेशी चुनौती

मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटीज़ एक्ट, 2002 के तहत पंजीकृत ‘भारत टैक्सी’ 6 जून 2025 से पूरी मजबूती के साथ बाजार में है। यह प्लेटफॉर्म ‘जीरो-कमीशन’ और ‘सर्ज-फ्री’ प्राइसिंग मॉडल पर काम करता है, जो इसे ग्राहकों और ड्राइवरों दोनों के लिए आकर्षक बनाता है। जहाँ निजी कंपनियां डिमांड बढ़ने पर किराया बढ़ा देती हैं (सर्ज प्राइसिंग), वहीं भारत टैक्सी एक स्थिर और उचित मूल्य प्रणाली सुनिश्चित करती है।

देशव्यापी विस्तार की योजना

वर्तमान में यह सेवा दिल्ली-एनसीआर और गुजरात के प्रमुख शहरों में सफलतापूर्वक संचालित हो रही है। केंद्र सरकार की योजना के अनुसार, अगले दो वर्षों के भीतर ‘भारत टैक्सी’ का विस्तार देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में किया जाएगा। यह पहल न केवल ड्राइवरों को शोषण से मुक्ति दिलाएगी, बल्कि ‘सहकार से समृद्धि’ के मंत्र को धरातल पर चरितार्थ करते हुए परिवहन क्षेत्र में एक नया इतिहास रचेगी।

YuvaSahakar Desk