चालू वित्त वर्ष 2026-27 के आम बजट में कृषि क्षेत्र के लिए आधुनिक टेक्नोलॉजी और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया गया है। केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने कृषि क्षेत्र को पारंपरिक पद्धति से निकालकर आधुनिक और हाईटेक बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणा की है। आम बजट पेश करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती सीतारमण ने कृषि क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी घोषणा भारत विस्तार नामक एआई आधारित डिजिटल प्लेटफार्म की। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में कृषि अन्य संबद्ध क्षेत्रों की हिस्सेदारी 16 प्रतिशत तक है।
एआई आधारित भारत विस्तार का उद्देश्य किसानों को सीधे उनके मोबाइल पर मौसम की सटीक जानकारी, मृदा स्वास्थ्य (Soil Health) परीक्षण और फसलों के लिए हर मौसम में समय समय पर सलाह उपलब्ध कराना है।
यह पोर्टल ‘एग्री-स्टैक’ (AgriStack) के साथ एकीकृत होगा, जिससे किसानों की पहचान और उन्हें मिलने वाली सरकारी सहायता का पारदर्शी रिकॉर्ड रखा जा सकेगा। उच्च-मूल्य वाली फसलों (High-Value Crops) पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सरकार ने आयात कम करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए विशिष्ट फसलों पर फोकस किया है।
इसमें उन फसलों की खेती पर ज्यादा जोर दिया गया है, जिससे किसानों को अधिक आमदनी हो सकती है। इनमें नारियल, काजू और कोको: इन फसलों की पैदावार और निर्यात बढ़ाने के लिए नए प्रोत्साहन कार्यक्रमों की घोषणा की गई है। बागवानी (हार्टिकल्चर सेक्टर) का कायाकल्प किये जाने का प्रावधान है। पुराने बागानों को आधुनिक तकनीक से सुधारने और अखरोट, बादाम जैसे ड्राई फ्रूट्स की खेती का दायरा बढ़ाने के लिए विशेष फंड दिया गया है।
सैंडलवुड और अगर (Agar): चंदन और अगर जैसे कीमती पेड़ों की खेती को बढ़ावा देने के लिए भी योजनाएं पेश की गई हैं।
नीली अर्थव्यवस्था (Fisheries & Blue Economy) में मत्स्य पालन क्षेत्र को और मजबूती देने के लिए 500 जलाशयों का विकास किया जाएगा। मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए देश भर में 500 नए जलाशयों और अमृत सरोवरों को व्यावसायिक उपयोग के लिए विकसित किया जाएगा।
मत्स्य क्षेत्र को प्रोत्साहन देते हुए आम बजट में ड्यूटी-फ्री फिशिंग का प्रावधान किया गया है। भारतीय जहाजों द्वारा गहरे समुद्र में पकड़ी गई मछलियों को शुल्क मुक्त (Duty-Free) लैंडिंग की अनुमति दी गई है, जिससे समुद्री खाद्य निर्यात बढ़ेगा।
सब्सिडी और वित्तीय सहायताः पीएम-किसान (PM-Kisan): सालाना 6,000 रुपये की सम्मान राशि को जारी रखा गया है, हालांकि इसे बढ़ाने की चर्चा थी लेकिन सरकार का वर्तमान ध्यान इसे डिजिटल रूप से अधिक सटीक (100% e-KYC) बनाने पर है। उर्वरक सब्सिडी: खाद पर सब्सिडी के लिए लगभग 1.71 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है ताकि किसानों को पुरानी कीमतों पर ही खाद मिलती रहे।


