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मेंटल हेल्थ सेक्टर में बंपर अवसर, 12वीं के बाद चुनें साइकोलॉजी

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों की मांग और बढ़ेगी। अमेरिकी श्रम सांख्यिकी ब्यूरो के अनुसार 2026 से 2033 के बीच मनोवैज्ञानिकों के रोजगार में लगभग 7 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है, जो कई अन्य व्यवसायों की तुलना में तेज है। वहीं एलाय़ड मार्केट की रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक मानसिक स्वास्थ्य बाजार 2030 तक 537 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इससे स्पष्ट है कि भविष्य में इस क्षेत्र में योग्य पेशेवरों की भारी जरूरत होगी।

Published: 13:02pm, 10 Jun 2026

आज के दौर में मानसिक स्वास्थ्य दुनिया की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया भर में करीब 28 करोड़ लोग डिप्रेशन से प्रभावित हैं, जबकि करोड़ों लोग चिंता), तनाव और अन्य मानसिक विकारों से जूझ रहे हैं। भारत में भी मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार देश में लगभग 15 करोड़ लोगों को किसी न किसी मानसिक स्वास्थ्य सहायता की जरूरत है। ऐसे में साइकोलॉजी (मनोविज्ञान) का क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा कर रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों की मांग और बढ़ेगी। अमेरिकी श्रम सांख्यिकी ब्यूरो के अनुसार 2026 से 2033 के बीच मनोवैज्ञानिकों के रोजगार में लगभग 7 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है, जो कई अन्य व्यवसायों की तुलना में तेज है। वहीं एलाय़ड मार्केट की रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक मानसिक स्वास्थ्य बाजार 2030 तक 537 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इससे स्पष्ट है कि भविष्य में इस क्षेत्र में योग्य पेशेवरों की भारी जरूरत होगी।

सबसे अच्छी बात यह है कि आर्ट्स, साइंस या कॉमर्स किसी भी स्ट्रीम के छात्र 12वीं के बाद साइकोलॉजी में करियर बना सकते हैं। इसकी शुरुआत बीए (ऑनर्स) साइकोलॉजी, बीएससी साइकोलॉजी या इंटीग्रेटेड साइकोलॉजी कोर्स से की जा सकती है। स्नातक के बाद छात्र क्लिनिकल साइकोलॉजी, काउंसलिंग साइकोलॉजी, हेल्थ साइकोलॉजी, न्यूरोसाइकोलॉजी और इंडस्ट्रियल/ऑर्गेनाइजेशनल साइकोलॉजी जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल कर सकते हैं।

क्लिनिकल साइकोलॉजी मानसिक रोगों के निदान और उपचार से जुड़ी है, जबकि काउंसलिंग साइकोलॉजी तनाव, अवसाद, रिश्तों और जीवन की चुनौतियों से जूझ रहे लोगों की मदद करती है। वहीं इंडस्ट्रियल साइकोलॉजी कॉर्पोरेट सेक्टर में कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य, कार्यक्षमता और कार्य-संतुष्टि को बेहतर बनाने पर केंद्रित होती है। लाइसेंस प्राप्त क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट बनने के लिए मास्टर डिग्री के बाद आरसीआई से मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण आवश्यक होता है।

साइकोलॉजी की पढ़ाई केवल सिद्धांतों तक सीमित नहीं होती। इसमें मानव व्यवहार, भावनाओं, निर्णय लेने की प्रक्रिया, मानसिक विकारों और सामाजिक संबंधों का अध्ययन किया जाता है। साथ ही छात्रों को सहानुभूति, सक्रिय श्रवण, संवाद कौशल, शोध एवं डेटा विश्लेषण, नैतिकता और समस्या समाधान जैसे महत्वपूर्ण कौशल भी सिखाए जाते हैं। यही कारण है कि मनोविज्ञान के विद्यार्थी विभिन्न क्षेत्रों में सफल करियर बना पाते हैं।

रोजगार के अवसरों की बात करें तो मनोविज्ञान की डिग्री प्राप्त करने के बाद अस्पतालों, मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों, स्कूलों, कॉलेजों, कॉर्पोरेट कंपनियों, गैर-सरकारी संगठनों), पुनर्वास केंद्रों और शोध संस्थानों में काम किया जा सकता है। इसके अलावा ऑनलाइन काउंसलिंग और टेली-मेंटल हेल्थ सेवाओं के बढ़ते चलन ने फ्रीलांस और निजी प्रैक्टिस के अवसर भी बढ़ाए हैं।

वेतन के लिहाज से भी यह क्षेत्र आकर्षक माना जाता है। शुरुआती स्तर पर मनोविज्ञान स्नातक 40,000 से 50,000 रुपये प्रतिमाह तक कमा सकते हैं। अनुभव और विशेषज्ञता बढ़ने के साथ यह आय लाखों रुपये प्रतिमाह तक पहुंच सकती है। निजी क्लिनिक, कॉर्पोरेट कंसल्टिंग और ऑनलाइन काउंसलिंग के माध्यम से भी अच्छी कमाई की जा सकती है।

मानसिक स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता, डिजिटल हेल्थ सेवाओं के विस्तार और विशेषज्ञों की बढ़ती मांग को देखते हुए साइकोलॉजी आज के समय के सबसे उभरते हुए करियर विकल्पों में से एक है। यदि आपकी रुचि लोगों को समझने, उनकी समस्याओं का समाधान करने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में है, तो 12वीं के बाद साइकोलॉजी आपके लिए एक शानदार और भविष्य सुरक्षित करियर साबित हो सकता है।

YuvaSahakar Team