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विकसित कृषि संकल्प अभियान किया जाएगा फिर से शुरु, शिवराज सिंह चौहान का बड़ा ऐलान

कृषि मंत्रालय और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा चलाया गया 15 दिवसीय "विकसित कृषि संकल्प अभियान" 12 जून को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। इस अभियान की जानकारी देते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "विकसित भारत" के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक अहम कदम है। उन्होंने बताया कि खुद वे हर हफ्ते दो दिन खेतों का दौरा करेंगे, जबकि कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) के वैज्ञानिकों को सप्ताह में तीन दिन किसानों के बीच जाना अनिवार्य होगा।

Published: 15:24pm, 19 Jun 2025

कृषि मंत्रालय और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा चलाया गया 15 दिवसीय “विकसित कृषि संकल्प अभियान” 12 जून को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। इस अभियान की जानकारी देते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत” के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक अहम कदम है। उन्होंने बताया कि खुद वे हर हफ्ते दो दिन खेतों का दौरा करेंगे, जबकि कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) के वैज्ञानिकों को सप्ताह में तीन दिन किसानों के बीच जाना अनिवार्य होगा।

कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों से सीधा संवाद ही उनके असली मुद्दों और जरूरतों को समझने का सबसे कारगर माध्यम है। उन्होंने अधिकारियों को भी निर्देश दिए कि वे निश्चित समय पर खेतों में जाकर किसानों के साथ संवाद करें। उन्होंने बताया कि पीएम मोदी ने पिछले वर्ष पूसा परिसर में 65 फसलों की 129 नई किस्मों का लोकार्पण किया था और उसी से प्रेरणा लेकर “लैब टू लैंड” मॉडल को आधार बनाकर यह अभियान चलाया गया है।

हालांकि यह अभियान औपचारिक रूप से समाप्त हो गया है, कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह एक सतत प्रक्रिया है और रबी सीजन में इसे फिर से शुरू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 24 जून को पूसा संस्थान में सभी वैज्ञानिक एक बैठक में शामिल होंगे, जिसमें आगामी रणनीतियों पर चर्चा होगी। इसके साथ ही 26 जून को इंदौर में सोयाबीन की समस्याओं पर किसान और वैज्ञानिकों के साथ बैठक की जाएगी।

आगे उन्होंने यह भी कहा कि अमानक बीज और कीटनाशकों को लेकर कड़े कदम उठाए जाएंगे। किसानों ने शिकायत की है कि कीटनाशकों का असर नहीं हो रहा, जिससे उत्पादन प्रभावित हो रहा है। ऐसे में सीड एक्ट और पेस्टीसाइड एक्ट को सख्त बनाया जाएगा ताकि किसानों को गुणवत्तायुक्त सामग्री उपलब्ध हो और उनकी पैदावार में वृद्धि हो सके।

YuvaSahakar Desk