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मछुआरों और मत्स्य पालकों के सशक्तीकरण के लिए एफएफपीओ को बढ़ावा

केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि मत्स्य, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के तहत आने वाले मत्स्य विभाग ने मार्च 2023 में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी, जिसके तहत राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) को तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्थित 1,000 प्राथमिक मत्स्य सहकारी समितियों (पीएफसीएस) को एफएफपीओ में परिवर्तित करने की अनुमति दी गई। यह पहल पीएमएमएसवाई के तहत 225.50 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता से कार्यान्वित की जा रही है।

Published: 12:32pm, 18 Feb 2026

केंद्र सरकार प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत मौजूदा सहकारी समितियों को मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों (एफएफपीओ) में परिवर्तित करके मत्स्य सहकारी क्षेत्र को बढ़ावा दे रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य मछुआरों और मत्स्य पालकों का आर्थिक सशक्तीकरण, बाजार तक पहुंच और संस्थागत मजबूती पर जोर देना है। संस्थागत सुधारों और लक्षित वित्तीय सहायता के माध्यम से मत्स्य सहकारी समितियों को मजबूत करने पर केंद्र सरकार का पूरा फोकस है।

केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि मत्स्य, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के तहत आने वाले मत्स्य विभाग ने मार्च 2023 में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी, जिसके तहत राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) को तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्थित 1,000 प्राथमिक मत्स्य सहकारी समितियों (पीएफसीएस) को एफएफपीओ में परिवर्तित करने की अनुमति दी गई। यह पहल पीएमएमएसवाई के तहत 225.50 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता से कार्यान्वित की जा रही है।

इसके तहत महाराष्ट्र में सबसे अधिक आवंटन हुआ है। यहां 316 सहकारी समितियों को बदलाव के लिए चिन्हित किया गया। इसके बाद आंध्र प्रदेश में 182 समितियां, गुजरात में 146, केरल में 124 और तमिलनाडु में 105 समितियों की पहचान की गई। कर्नाटक को 62 समितियां, पश्चिम बंगाल को 40, ओडिशा को 21 और गोवा को चार समितियां आवंटित की गई हैं, जिससे देश भर में कुल पीएफसीएस की संख्या 1,000 हो गई है। इस बदलाव का उद्देश्य मछुआरों की सौदेबाजी शक्ति को बढ़ाना, मूल्य प्राप्ति में सुधार करना और बाजारों, वित्त और प्रौद्योगिकी तक सामूहिक पहुंच को सक्षम बनाना है।

प्रत्येक एफएफपीओ को वित्तीय पैकेज के माध्यम से सहायता प्रदान की जाती है, जिसमें गठन और इनक्यूबेशन लागत, प्रबंधन सहायता और पीएमएमएसवाई के तहत इक्विटी अनुदान शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, एनसीडीसी परिचालन स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए रियायती वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान कर रहा है। इस सहायता के तहत एनसीडीसी ने पहले ही कई राज्यों में मूल्यवर्धन और एकीकृत मत्स्य परियोजनाओं को सुगम बनाया है।

इनमें बिहार में संबद्ध गतिविधियों सहित एकीकृत मछली पालन इकाइयां, महाराष्ट्र में मछली मूल्यवर्धन और आपूर्ति श्रृंखला विकास परियोजनाएं, गुजरात में जलाशय विकास पहल और उत्तर प्रदेश में कोल्ड स्टोरेज आधारित मछली प्रसंस्करण उद्यम शामिल हैं। इनके लिए केंद्र सरकार से प्रति परियोजना 38 लाख रुपये से 50 लाख रुपये तक की सहायता प्रदान की जा रही है।

मत्स्य पालन क्षेत्र के संस्थागत आधार को और मजबूत करते हुए मत्स्य विभाग ने मार्च 2023 में देश भर में 70 नए मछली पालन संगठनों (FFPOs) के गठन के लिए एक और NCDC प्रस्ताव को भी मंजूरी दी। इसकी कुल लागत 37.80 करोड़ रुपये है। ये नए FFPOs 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पंजीकृत किए गए हैं। इनमें ओडिशा और तमिलनाडु में छह-छह, बिहार में छह, महाराष्ट्र में पांच, मध्य प्रदेश में पांच और उत्तराखंड में पांच शामिल हैं। आंध्र प्रदेश सात नए पंजीकृत FFPOs के साथ एक प्रमुख लाभार्थी के रूप में उभरा है। साथ ही गुजरात, केरल, कर्नाटक, जम्मू और कश्मीर, लद्दाख और कई पूर्वोत्तर राज्यों में भी नए संगठन पंजीकृत किए गए हैं। आंध्र प्रदेश में 182 पीएफसी को एफएफपीओ में परिवर्तित करने के व्यापक कार्यक्रम के तहत कोनासीमा जिला 34 सहकारी समितियों के साथ सबसे आगे है।

YuvaSahakar Team