भारत में खेती और स्वच्छ ऊर्जा को एक साथ आगे बढ़ाने के लिए एग्रीवोल्टाइक्स तेजी से उभरता मॉडल बन रहा है। इसमें एक ही भूमि पर फसल उत्पादन और सौर बिजली उत्पादन किया जाता है। देश में लगभग 46.1 प्रतिशत आबादी की आजीविका कृषि पर निर्भर है, जबकि 2025-26 में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र का सकल मूल्य वर्धन करीब 52.08 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।
देश का कुल रिपोर्टेड क्षेत्रफल 306.96 मिलियन हेक्टेयर है, जिसमें करीब 55 प्रतिशत कृषि भूमि है। शुद्ध बोया गया क्षेत्र 138.99 मिलियन हेक्टेयर और सकल फसली क्षेत्र 217.88 मिलियन हेक्टेयर है। यह विशाल भूमि आधार खेती के साथ सौर ऊर्जा उत्पादन की बड़ी संभावना प्रस्तुत करता है।
अगस्त 2025 तक भारत में 36 परिचालन एग्रीवोल्टाइक्स परियोजनाएं थीं, जिनकी कुल स्थापित क्षमता 37.54 मेगावाट थी। इसके अलावा 10 पायलट परियोजनाएं विकासाधीन थीं। देश की एग्रीवोल्टाइक्स क्षमता का अनुमान 3,000 गीगावाट से करीब 14,000 गीगावाट तक लगाया गया है। कुछ मामलों में किसानों की सालाना आय करीब 60 हजार रुपये प्रति एकड़ से बढ़कर एक लाख रुपये से अधिक प्रति एकड़ तक पहुंच सकती है।
राष्ट्रीय स्तर की भौगोलिक सूचना प्रणाली आधारित जांच में 47.35 मिलियन हेक्टेयर कृषि भूमि को एग्रीवोल्टाइक्स के लिए उपयुक्त पाया गया है। महाराष्ट्र, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश मिलकर देश की अनुमानित एग्रीवोल्टाइक्स बिजली क्षमता का करीब 50 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं। पीएम-कुसुम योजना के तहत लगभग 34,422 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता का प्रावधान भी कृषि में सौर ऊर्जा विस्तार को समर्थन देता है


