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तबला वादक उस्ताद ज़ाकिर हुसैन का 73 वर्ष की आयु में निधन

जाकिर हुसैन ने अपनी कला से भारत का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया। लोग उन्हें एक बेहतरीन तबला वादक के रूप में जानते हैं। उनके जाने से संगीत की दुनिया बहुत सूनी हो गई है।

Published: 16:48pm, 16 Dec 2024

महान तबला वादक (Tabla Maestro) ज़ाकिर हुसैन (Zakir Hussain) का अमेरिका (USA) के सैन फ्रांसिस्को के एक अस्पताल में 73 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे लंबे समय से फेफड़ों की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। ज़ाकिर हुसैन (Zakir Husain Death) भारतीय शास्त्रीय और विश्व संगीत में अपनी गहरी छाप छोड़ गए हैं।

9 मार्च, 1951 को मुंबई में जन्मे ज़ाकिर हुसैन प्रसिद्ध तबला वादक उस्ताद अल्ला रक्खा के बेटे थे। उन्होंने कम उम्र में ही तबला सीखना शुरू कर दिया था और समय के साथ दुनिया के सबसे बेहतरीन तबलावादकों में शुमार हो गए। हुसैन की शानदार कला और नए अंदाज ने तबला वादन को रिवायती अंदाज़ से बदलकर एक विश्व प्रसिद्ध कला बना दिया।

अपने शानदार करियर के दौरान, ज़ाकिर हुसैन ने पंडित रवि शंकर, वायलिन वादक एल. सुब्रमण्यम और गिटार वादक जॉन मैकलॉफलिन जैसे प्रसिद्ध कलाकारों के साथ काम किया। उन्होंने फ्यूजन बैंड शक्ति (Shakti) की सह-स्थापना की, जिसने भारतीय शास्त्रीय संगीत को जैज़ और वेस्टर्न म्यूजिक के साथ जोड़ते हुए रिवायती संगीत की सीमाओं को तोड़ा।

ज़ाकिर हुसैन को अनेक प्रतिष्ठित सम्मान मिले, जिनमें पद्म श्री (1988), पद्म भूषण (2002) और पद्म विभूषण (2023) शामिल हैं। वे इन तीनों नागरिक सम्मानों से सम्मानित होने वाले चुनिंदा कलाकारों में से एक थे। उन्होंने प्लैनेट ड्रम (Planet Drum) एलबम पर सहयोग के लिए ग्रैमी पुरस्कार भी जीता। उन्होंने दुनिया भर में भारतीय संगीत को एक नई पहचान दिलाई और तबले की बारीकियों की शिक्षा दी।

ज़ाकिर हुसैन के निधन से संगीत जगत को बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। कलाकारों, राजनेताओं और प्रशंसकों ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि जब तक इस धरती पर लोगों के दिल धड़कते रहेंगे, उस्ताद की धुन जीवित रहेगी। ज़ाकिर हुसैन की आत्मा को छूने वाली थापें करोड़ों लोगों के दिलों में हमेशा गूंजती रहेंगी और संगीत की दुनिया में उनके योगदान को हमेशा ज़िंदा रखेंगी।

YuvaSahakar Desk

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