सहकारिता मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत सांविधिक संगठन राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) द्वारा संचालित युवा सहकार योजना के माध्यम से देशभर में नवस्थापित और अभिनव सहकारी समितियों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य युवाओं के नए और नवाचार आधारित विचारों को सहकारिता के माध्यम से बढ़ावा देना है।
वित्तीय वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25 के दौरान युवा सहकार योजना के अंतर्गत विभिन्न राज्यों में सहकारी समितियों को कुल 327 लाख रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता प्रदान की गई, जिससे 16,500 से अधिक लाभार्थी सदस्य लाभान्वित हुए।
वित्तीय वर्ष 2022-23 में आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश में योजना के तहत 24.75 लाख रुपये की सहायता जारी की गई, जिससे 354 लाभार्थी सदस्य जुड़े। वित्तीय वर्ष 2023-24 में बिहार, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में योजना का विस्तार हुआ और 136.31 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई, जिससे 5,208 लाभार्थी सदस्य लाभान्वित हुए। वित्तीय वर्ष 2024-25 में बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में योजना के तहत 165.91 लाख रुपये जारी किए गए, जिसके माध्यम से 11,010 लाभार्थी सदस्यों को सहयोग मिला।
युवा सहकार योजना के माध्यम से युवाओं को सहकारी ढांचे के अंतर्गत रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को गति मिल रही है।
यह जानकारी केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
आइये जानते है युवा सहकार योजना के बारे में:
युवा सहकार योजना क्या है?
यह एनसीडीसी द्वारा संचालित योजना है, जिसका उद्देश्य नए और अभिनव विचारों पर आधारित नवस्थापित सहकारी समितियों को वित्तीय सहायता देकर प्रोत्साहित करना है।
इस योजना का मुख्य लाभ किसे मिलता है?
नवस्थापित सहकारी समितियों से जुड़े युवा सदस्य और उद्यमी इस योजना के मुख्य लाभार्थी हैं।
योजना के तहत कितनी वित्तीय सहायता दी जाती है?
योजना के अंतर्गत परियोजना की आवश्यकता और व्यवहार्यता के अनुसार एनसीडीसी द्वारा वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
अब तक कितने लोग इस योजना से लाभान्वित हुए हैं?
वित्त वर्ष 2022-23 से 2024-25 के बीच 16,500 से अधिक युवा लाभार्थी योजना से जुड़े हैं।
युवा सहकार योजना का उद्देश्य क्या है?
युवाओं को सहकारिता से जोड़कर रोजगार, स्वरोजगार और नवाचार को बढ़ावा देना तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करना।


