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असम में दुनिया का पहला बांस आधारित इथेनॉल प्लांट तैयार

प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर इथेनॉल उत्पादन में भारत की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि 2014 में जहां केवल 1.53% इथेनॉल ब्लेंडिंग होती थी, वहीं 2022 में यह 10% तक पहुंच गई और 2025 का लक्ष्य समय से पहले ही हासिल कर लिया गया।

Published: 13:49pm, 15 Sep 2025

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को असम के गोलाघाट जिले के नुमालीगढ़ में दुनिया के पहले बांस से इथेनॉल बनाने वाले अत्याधुनिक संयंत्र का उद्घाटन किया। करीब 5,000 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस संयंत्र को जीरो वेस्ट तकनीक पर विकसित किया गया है। इसमें बांस के पौधे के हर हिस्से का उपयोग किया जाएगा।

यहां इथेनॉल के साथ-साथ ग्रीन फर्फ्यूरल, ग्रीन एसेटिक एसिड, खाद्य-ग्रेड सीओ2 और बायो-कोल जैसे उच्च मूल्य वाले औद्योगिक रसायन तैयार होंगे। साथ ही, संयंत्र से 25 मेगावॉट ग्रीन बिजली का भी उत्पादन किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना से असम की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को हर साल 200 करोड़ रुपये का लाभ होगा और पूर्वोत्तर के चार राज्यों से पांच लाख टन हरे बांस की खरीद होगी। इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 50 हजार से अधिक लोगों को रोजगार और लाभ मिलेगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर इथेनॉल उत्पादन में भारत की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि 2014 में जहां केवल 1.53% इथेनॉल ब्लेंडिंग होती थी, वहीं 2022 में यह 10% तक पहुंच गई और 2025 का लक्ष्य समय से पहले ही हासिल कर लिया गया।

इसी कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने 7,000 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले पॉलीप्रोपाइलीन प्लांट की भी आधारशिला रखी। इस प्लांट से आधुनिक तकनीक से प्लास्टिक उत्पाद तैयार होंगे और देश की पॉलीप्रोपाइलीन आयात निर्भरता 20% तक घटेगी। साथ ही, हर साल लगभग 85 मिलियन डॉलर की विदेशी मुद्रा की बचत होगी।

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इन परियोजनाओं को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे असम और पूरा पूर्वोत्तर हरित ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल्स के वैश्विक मानचित्र पर विशेष पहचान बनाएगा।

गौरतलब है कि नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड की स्थापना 22 अप्रैल 1993 को हुई थी। वर्तमान में इसमें ऑयल इंडिया लिमिटेड का 69.63%, असम सरकार का 26% और इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड का 4.37% हिस्सा है।

 

Diksha