Trending News

सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर को ठहराया वैध, चुनाव आयोग को दिया अधिकार कर्नाटक में मुख्यमंत्री बदलने की अटकलें, डीके शिवकुमार को सत्ता सौंप सकते हैं सिद्धारमैया केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के घर सहित 12 ठिकानों पर ईडी की रेड, मनी लॉन्ड्रिंग का है मामला, बेटी भी आरोपों के घेरे में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने गुजरात टायटंस को 92 रनों से दी पटखनी, IPL 2026 के फाइनल में पहुंची सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर को ठहराया वैध, चुनाव आयोग को दिया अधिकार कर्नाटक में मुख्यमंत्री बदलने की अटकलें, डीके शिवकुमार को सत्ता सौंप सकते हैं सिद्धारमैया केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के घर सहित 12 ठिकानों पर ईडी की रेड, मनी लॉन्ड्रिंग का है मामला, बेटी भी आरोपों के घेरे में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने गुजरात टायटंस को 92 रनों से दी पटखनी, IPL 2026 के फाइनल में पहुंची

डॉ. वी. नारायणन ने संभाला ISRO प्रमुख का कार्यभार, एस. सोमनाथ की ली जगह

Published: 17:15pm, 14 Jan 2025

डॉ. वी. नारायणन (V Narayanan) ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष का कार्यभार संभाल लिया है. उन्होंने एस. सोमनाथ (S. Somnath) की जगह ली है. ISRO ने अपने बयान में कहा कि प्रतिष्ठित वैज्ञानिक (शीर्ष ग्रेड) डॉ. वी नारायणन (ISRO Chairman) ने अंतरिक्ष विभाग के सचिव, अंतरिक्ष आयोग के अध्यक्ष और इसरो के अध्यक्ष का पदभार ग्रहण किया.

ISRO का अध्यक्ष बनने से पहले नारायणन ने इसरो के ‘लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर’ (LPSC) के निदेशक के रूप में कार्य किया, जो प्रक्षेपण यानों और अंतरिक्ष यानों की प्रणोदन प्रणालियों के विकास के लिए जिम्मेदार एक प्रमुख केंद्र है. उन्होंने भारत के महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन ‘गगनयान’ कार्यक्रम के लिए राष्ट्रीय स्तर के ह्यूमन रेटेड सर्टिफिकेशन बोर्ड (एचआरसीबी) के अध्यक्ष के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

कौन हैं डॉ. वी. नारायणन ?

डॉ. वी. नारायणन देश के जाने-माने वैज्ञानिक और रॉकेट प्रौद्योगिकी के विशेषज्ञ हैं. उन्होंने आईआईटी खड़गपुर से क्रायोजेनिक इंजीनियरिंग में एम.टेक और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में पीएचडी की डिग्री हासिल की है. वह 1984 में ISRO से जुड़े थे और अपने लगभग 40 वर्ष के कार्यकाल में उन्होंने भारत के अंतरिक्ष मिशन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है.

डॉ. वी. नारायणन 2018 में LPSC के निदेशक बने. उनकी उपलब्धियों में GSLV Mk III व्हीकल का C25 क्रायोजेनिक प्रोजेक्ट शामिल है, जिसमें उन्होंने प्रोजेक्ट डायरेक्टर की भूमिका निभाई. चंद्रयान-3 की सफलता में डॉ. वी. नारायणन का बड़ा योगदान रहा. उन्होंने क्रायोजेनिक प्रोपल्शन सिस्टम के विकास का नेतृत्व किया, जिसने भारत को इस तकनीक में सक्षम देशों की सूची में शामिल कर दिया. इसी प्रणाली का उपयोग चंद्रयान-2 और एलवीएम3/चंद्रयान-3 के लॉन्च में किया गया. यह प्रणाली भारत को लॉन्च व्हीकल में आत्मनिर्भरता दिलाने में महत्वपूर्ण रही है.

डॉ. वी. नारायणन ने पीएसएलवी सी57/आदित्य एल1 मिशन के लिए, उन्होंने दूसरे और चौथे चरण, नियंत्रण बिजली संयंत्रों और प्रणोदन प्रणाली को तैयार करने की देखरेख की, जिससे अंतरिक्ष यान को एल1 पर हेलो कक्षा में स्थापित करने में मदद मिली. इतना ही नहीं, इस मिशन के कारण भारत सूर्य का सफलतापूर्वक अध्ययन करने वाला चौथा देश बन गया.

ISRO प्रमुख का पदभार ग्रहण करने से पहले नारायणन ने कहा कि इसरो में उनके सहकर्मी हमेशा इस दृष्टिकोण के साथ काम करते हैं कि वे देश और उसके लोगों के कल्याण के लिए काम करें. उन्होंने कहा कि हम सभी मानते हैं कि इसरो और देश व्यक्ति से ऊपर हैं और हम हमेशा अपने देश के लिए काम करते रहेंगे.

YuvaSahakar Desk