Trending News

अमेरिका-ईरान जंग खत्म करने पर बनी सहमति, 19 जून को समझौते पर होगा दस्तखत, होर्मुज फिर खुलेगा लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ होंगे नए आर्मी चीफ, 30 जून से पदभार संभालेंगे 100% एथेनॉल से चलेंगी गाड़ियां, केंद्र सरकार ने दी मंजूरी जेवर एयरपोर्ट से यात्री उड़ानों का आगाज, लखनऊ से पहुंची पहली फ्लाइट का हुआ भव्य स्वागत टीएमसी के बागी सांसदों का नया ठिकाना, सीधे 20 सांसदों वाली पार्टी बनी NCPI अमेरिका-ईरान जंग खत्म करने पर बनी सहमति, 19 जून को समझौते पर होगा दस्तखत, होर्मुज फिर खुलेगा लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ होंगे नए आर्मी चीफ, 30 जून से पदभार संभालेंगे 100% एथेनॉल से चलेंगी गाड़ियां, केंद्र सरकार ने दी मंजूरी जेवर एयरपोर्ट से यात्री उड़ानों का आगाज, लखनऊ से पहुंची पहली फ्लाइट का हुआ भव्य स्वागत टीएमसी के बागी सांसदों का नया ठिकाना, सीधे 20 सांसदों वाली पार्टी बनी NCPI

भारतीय नौसेना को मिला पहला एडवांस गाइडेड मिसाइल युद्धपोत “हिमगिरि”

हिमगिरि को 14 दिसंबर 2020 को लॉन्च किया गया था। यह जहाज ब्रह्मोस एंटी-शिप और लैंड-अटैक क्रूज़ मिसाइलों के साथ-साथ बराक-8 एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइलों से लैस है। इसके साथ ही यह उन्नत एईएसए रडार, आधुनिक लड़ाकू प्रणालियों और डीजल इंजन-गैस टर्बाइन संयोजन से संचालित होता है। यह युद्धपोत वायु-रोधी, सतह-रोधी और पनडुब्बी-रोधी युद्ध संचालन में पूरी तरह सक्षम है।

Published: 11:59am, 01 Aug 2025

भारतीय नौसेना की मारक क्षमता को नई मजबूती देने वाला पहला एडवांस गाइडेड मिसाइल युद्धपोत हिमगिरि गुरुवार को नौसेना को सौंप दिया गया। यह युद्धपोत परियोजना 17ए के तहत तैयार किया गया है और इसे सरकारी रक्षा कंपनी गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) लिमिटेड ने निर्मित किया है।

149 मीटर लंबे और 6670 टन वजनी हिमगिरि जीआरएसई द्वारा अब तक बनाया गया सबसे बड़ा और अत्याधुनिक गाइडेड मिसाइल युद्धपोत है। जीआरएसई के इतिहास में यह 801वां और अब तक का सबसे परिष्कृत पोत है। इसे कोलकाता में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पूर्वी नौसेना कमान के चीफ स्टॉफ आफिसर (तकनीकी) रियर एडमिरल रवनीश सेठ ने भारतीय नौसेना की ओर से औपचारिक रूप से स्वीकार किया।

ब्रह्मोस और बराक-8 मिसाइलों से लैस

हिमगिरि को 14 दिसंबर 2020 को लॉन्च किया गया था। यह जहाज ब्रह्मोस एंटी-शिप और लैंड-अटैक क्रूज़ मिसाइलों के साथ-साथ बराक-8 एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइलों से लैस है। इसके साथ ही यह उन्नत एईएसए रडार, आधुनिक लड़ाकू प्रणालियों और डीजल इंजन-गैस टर्बाइन संयोजन से संचालित होता है। यह युद्धपोत वायु-रोधी, सतह-रोधी और पनडुब्बी-रोधी युद्ध संचालन में पूरी तरह सक्षम है।

21,833 करोड़ से अधिक की लागत

परियोजना 17ए के तहत तीन एडवांस गाइडेड मिसाइल युद्धपोतों का निर्माण किया जा रहा है, जिनमें से हिमगिरि पहला है। तीनों पोतों पर कुल 21,833 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान है। जीआरएसई अब तक 112 युद्धपोत बना चुका है, जो किसी भी भारतीय शिपयार्ड का रिकॉर्ड है।

नौसैनिकों के लिए सुविधाएं

हिमगिरि पर 225 नौसैनिकों और अधिकारियों के लिए आरामदायक आवास की व्यवस्था की गई है। साथ ही इस पर हेलीकॉप्टर संचालन के लिए भी पूर्ण विमानन सुविधाएं मौजूद हैं।

 

Diksha