भारत और न्यूजीलैंड ने शिक्षा, शोध, विज्ञान और नई तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की न्यूजीलैंड यात्रा के दौरान उनकी प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन से हुई बातचीत में उच्च शिक्षा और रिसर्च को द्विपक्षीय संबंधों का अहम हिस्सा बताया गया। वर्तमान में करीब 13 हजार भारतीय छात्र न्यूजीलैंड में पढ़ाई कर रहे हैं। चीन के बाद भारत न्यूजीलैंड के लिए अंतरराष्ट्रीय छात्रों का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत देश है।
भारतीय छात्र न्यूजीलैंड में मुख्य रूप से आईटी, बिजनेस मैनेजमेंट, इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर, हॉस्पिटैलिटी और डेटा साइंस जैसे विषयों की पढ़ाई करते हैं। छात्रों की बढ़ती संख्या को देखते हुए न्यूजीलैंड सरकार और वहां की यूनिवर्सिटीज भारतीय विद्यार्थियों के लिए कई स्कॉलरशिप योजनाएं चला रही हैं।
इनमें न्यूजीलैंड एक्सीलेंस अवार्ड्स भारतीय छात्रों के लिए विशेष रूप से उपलब्ध हैं। इसके तहत स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की ट्यूशन फीस में आंशिक छूट दी जाती है। मानाकी न्यूजीलैंड स्कॉलरशिप मुख्य रूप से मास्टर्स और पीएचडी छात्रों के लिए है। यह फुल फंडेड स्कॉलरशिप है, जिसमें पूरी ट्यूशन फीस, आने-जाने का हवाई किराया, रहने का भत्ता और सेट-अप अलाउंस शामिल होता है।
यूनिवर्सिटी ऑफ ऑकलैंड इंडिया हाई अचीवर्स स्कॉलरशिप के तहत मेधावी भारतीय छात्रों को करीब 10 लाख रुपये तक की सहायता मिल सकती है। वहीं IPU न्यूजीलैंड की SEG स्कॉलरशिप में छात्रों को 3,000 से 5,000 न्यूजीलैंड डॉलर तक की वार्षिक फीस छूट दी जाती है।
अब यूनिवर्सिटी ऑफ कैंटरबरी ने भी अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए यूसी इंटरनेशनल फर्स्ट ईयर स्कॉलरशिप की घोषणा की है। इसके तहत स्नातक के पहले वर्ष में प्रवेश लेने वाले चयनित छात्रों को 15,000 न्यूजीलैंड डॉलर, यानी करीब 14 लाख रुपये तक की ट्यूशन फीस सहायता दी जाएगी। विश्वविद्यालय हर वर्ष लगभग 10 छात्रों को यह स्कॉलरशिप प्रदान करता है।
छात्रों का चयन अकादमिक प्रदर्शन, नेतृत्व क्षमता, चरित्र और सामाजिक, सांस्कृतिक या खेल गतिविधियों में भागीदारी के आधार पर होगा। आवेदन की अंतिम तिथि 6 अगस्त 2026 है। उम्मीदवारों को विश्वविद्यालय के myUC पोर्टल पर एडमिशन आवेदन पूरा करने के बाद स्कॉलरशिप फॉर्म भरना होगा।


