बिहार सरकार राज्य के स्थानीय और क्षेत्रीय उत्पादों को बढ़ावा देने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए नई सहकारिता नीति 2026 के तहत उत्पादकों को सहकारी समूहों में संगठित करने की दिशा में काम कर रही है। बिहार सहकारिता विभाग की इस पहल का उद्देश्य स्थानीय उत्पादकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना, पारंपरिक उत्पादों की पहचान बढ़ाना और उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है।
इस पहल के तहत विशेष रूप से भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्राप्त उत्पादों को बढ़ावा देने और उनसे जुड़े बौद्धिक संपदा अधिकारों की सुरक्षा पर जोर दिया जा रहा है। सहकारी समितियों के माध्यम से छोटे और बिखरे हुए उत्पादकों को एक साझा मंच पर लाकर उनके उत्पादों की बाजार तक पहुंच आसान बनाने की योजना है। इससे स्थानीय उत्पादों की मांग बढ़ाने, उनकी ब्रांडिंग को मजबूत करने और उत्पादकों को बेहतर आर्थिक अवसर उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
बिहार सरकार की इस पहल का उद्देश्य किसानों और स्थानीय कारीगरों की आय बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और टिकाऊ आजीविका के अवसर पैदा करना है। सहकारिता मॉडल के जरिए स्थानीय उद्यमों को प्रोत्साहित कर राज्य के पारंपरिक उत्पादों को व्यापक बाजार में पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। यह पहल समावेशी विकास और जमीनी स्तर पर आर्थिक सशक्तीकरण को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


