जॉइंट सीट एलोकेशन अथॉरिटी (JoSAA) की काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी इंजीनियरिंग में दाखिले से वंचित अभ्यर्थियों के लिए एक और अवसर उपलब्ध है। केंद्र सरकार से वित्तपोषित 119 इंजीनियरिंग संस्थानों में 15,423 सीटें खाली रहने के बाद सेंट्रल सीट एलोकेशन बोर्ड (CSAB) ने स्पेशल काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन सीटों पर प्रवेश JEE Main 2026 की ऑल इंडिया रैंक (AIR) के आधार पर किया जाएगा।
NIT, IIIT समेत 119 संस्थानों में मिलेगा दाखिला
सेंट्रल सीट एलोकेशन बोर्ड (CSAB) स्पेशल काउंसलिंग के तहत 31 नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NITs), 27 इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IIITs), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग साइंस एंड टेक्नोलॉजी (IIEST) शिबपुर तथा 60 सरकारी फंडेड टेक्निकल इंस्टीट्यूट्स (GFTIs) की खाली सीटों पर प्रवेश दिया जाएगा। इस प्रक्रिया में केवल वही अभ्यर्थी भाग ले सकते हैं जिनके पास वैध JEE Main 2026 ऑल इंडिया रैंक है और जो निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं।
कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग(CSE ) की 3,098 सीटें भी खाली
कुल 15,423 सीटों में 13,156 जेंडर-न्यूट्रल सीटें हैं, जबकि 2,267 सीटें महिला अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित हैं। छात्रों की सबसे पसंदीदा शाखाओं में शामिल कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (CSE) में भी 3,098 सीटें खाली हैं। इनमें NITs में 503, IIEST शिबपुर में 17, IIITs में 1,173 और GFTIs में 1,405 सीटें उपलब्ध हैं।
किस संस्थान में कितनी सीटें
संस्थानवार आंकड़ों के अनुसार, सरकारी फंडेड टेक्निकल इंस्टीट्यूट्स (GFTIs) में सबसे अधिक 6,945 सीटें खाली हैं। इसके अलावा NITs में 4,611, IIITs में 3,628 और IIEST शिबपुर में 239 सीटों पर दाखिला दिया जाएगा।
ये हैं महत्वपूर्ण तारीखें
CSAB स्पेशल काउंसलिंग के लिए पंजीकरण 28 जुलाई से शुरू हो चुके हैं और अभ्यर्थी 3 अगस्त 2026 सुबह 10 बजे तक आवेदन कर सकते हैं। पहला मॉक सीट आवंटन 31 जुलाई को जारी होगा, जबकि चॉइस फिलिंग और ऑटो-लॉकिंग की अंतिम समय सीमा 5 अगस्त दोपहर 2 बजे है।
पहले राउंड का सीट आवंटन परिणाम 6 अगस्त को घोषित किया जाएगा। इसके बाद 6 से 10 अगस्त तक ऑनलाइन रिपोर्टिंग और दस्तावेज सत्यापन होगा। दूसरे राउंड का सीट आवंटन 12 अगस्त को जारी होगा, जबकि 12 से 14 अगस्त तक ऑनलाइन रिपोर्टिंग की जाएगी। आवंटित संस्थानों में अभ्यर्थियों को 13 से 18 अगस्त 2026 के बीच फिजिकल रिपोर्टिंग करनी होगी।


