एनडीडीबी डेयरी सर्विसेज (एनडीएस) जो नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक संस्था है, ने डेयरी क्षेत्र में उन्नत गोवंशीय आनुवंशिकी, अनुसंधान, नवाचार और क्षमता निर्माण को मजबूत करने के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।
यह समझौता एनडीडीबी और एनडीएस के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह की उपस्थिति में संपन्न हुआ। औपचारिक रूप से एमओयू पर यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग के प्रोफेसर ऑफ एनिमल बायोटेक्नोलॉजी एवं जीबीयू–यूओई पार्टनरशिप के को-डायरेक्टर (इनोवेशन लीड) प्रो. ब्रूस व्हाइटलॉ और एनडीएस के प्रबंध निदेशक डॉ. सी. पी. देवनंद ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर प्रो. पीटर डोर्नर, डॉ. परेश पटेल सहित एनडीडीबी और एनडीएस के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
यह समझौता दीर्घकालिक शोध सहयोग के लिए एक संरचित ढांचा स्थापित करता है, जिसमें अगली पीढ़ी की प्रजनन रणनीतियों, जीनोमिक्स के उपयोग, उन्नत प्रजनन तकनीकों और रोग-प्रतिरोधी मवेशियों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साझेदारी का उद्देश्य अत्याधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान को भारत के चल रहे आनुवंशिक सुधार कार्यक्रमों के अनुरूप व्यावहारिक और व्यापक स्तर पर लागू होने योग्य समाधान में बदलना है।
समझौते के तहत दोनों संस्थान भारत के सहकारी डेयरी तंत्र में उन्नत जैव-प्रौद्योगिकी उपकरणों के एकीकरण पर मिलकर कार्य करेंगे। सहयोग के माध्यम से ज्ञान आदान-प्रदान, संयुक्त शोध परियोजनाएं और प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे, ताकि डेयरी क्षेत्र की उभरती चुनौतियों का समाधान करने में सक्षम कुशल मानव संसाधन तैयार किया जा सके।
डॉ. मीनेश शाह ने कहा कि एनडीडीबी और उसकी सहायक संस्थाएं वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोग को और गहरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के साथ साझेदारी तकनीकी क्षमताओं को सुदृढ़ करने और डेयरी विकास पहलों में उन्नत विज्ञान को शामिल करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि एनडीडीबी की पहलें- जिनमें रोग नियंत्रण, उन्नत प्रजनन कार्यक्रम, जीनोमिक चयन और सतत विकास से जुड़े प्रयास शामिल हैं। पशु स्वास्थ्य सुधारने, उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से संचालित की जा रही हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह नई साझेदारी नवाचार को गति देगी और भारत के आनुवंशिक सुधार प्रयासों को और मजबूत बनाएगी।
यह सहयोग वैश्विक विशेषज्ञता का लाभ उठाकर भारत के सहकारी डेयरी आंदोलन को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे वैज्ञानिक प्रगति का प्रत्यक्ष लाभ डेयरी किसानों तक पहुंचे और क्षेत्र का दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित हो सके।


