झारखंड सरकार ने गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना में अहम संशोधन करते हुए आर्थिक रूप से कमजोर छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में योजना के तहत चार लाख रुपये से अधिक और अधिकतम 15 लाख रुपये तक के शिक्षा ऋण पर लागू पांच प्रतिशत मार्जिन मनी की अनिवार्यता समाप्त करने का निर्णय लिया गया। इससे विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को पढ़ाई के शुरुआती खर्च के लिए अतिरिक्त राशि जुटाने की परेशानी कम होगी।
योजना में एक और महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब कॉलेज या विश्वविद्यालय में प्रवेश लेते समय विद्यार्थी द्वारा पहले से जमा की गई पहले सेमेस्टर या प्रथम वर्ष की फीस की राशि भी वेब पोर्टल के माध्यम से एकमुश्त प्रतिपूर्ति की जा सकेगी। अब तक पहले से जमा फीस के कारण कई छात्रों को वित्तीय कठिनाई का सामना करना पड़ता था।
सरकार ने योजना का दायरा भी बढ़ाया है। साउथ एशियन यूनिवर्सिटी, नालंदा यूनिवर्सिटी, इंडियन मेरिटाइम यूनिवर्सिटी, राजीव गांधी नेशनल एविएशन यूनिवर्सिटी और केंद्रीय विश्वविद्यालयों को भी योजना के अंतर्गत शामिल किया गया है। इससे विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिला लेने वाले अधिक विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल सकेगा।
गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत झारखंड के पात्र विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए 15 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण चार प्रतिशत सामान्य ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जाता है। ऋण के लिए बैंक को गारंटी राज्य सरकार देती है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों को बिना संपत्ति गिरवी रखे उच्च शिक्षा का अवसर मिल सके।
सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक तंगी के कारण राज्य का कोई भी योग्य छात्र उच्च शिक्षा से वंचित न रहे।


