नेपाल-चीन सीमा से लगे हिमालयी क्षेत्र में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने नेपाल में भारी तबाही मचाई है। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में अचानक आए सैलाब से रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा और चितवन समेत कई जिले प्रभावित हुए हैं। ताजा रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 160 से अधिक बताई जा रही है, जबकि 750 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। लापाता लोगों की संख्या बढ़ भी सकती है।
लापता लोगों में बड़ी संख्या भारतीय पर्यटकों और कैलाश मानसरोवर यात्रियों की है। नेपाल में 150 भारतीयों के लापता या संपर्क से बाहर होने की सूचना सामने आई है। इनमें पश्चिम बंगाल के करीब 32 और तमिलनाडु के 37यात्री भी शामिल बताए गए हैं। भारतीयों की तलाश और उनके परिजनों की सहायता के लिए विभिन्न राज्य सरकारें सक्रिय हो गई हैं। ओडिशा सरकार ने नई दिल्ली स्थित ओडिशा निवास में 24×7 कंट्रोल रूम स्थापित किया है जहां नेपाल में फंसे या लापता लोगों के संबंध में जानकारी और सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
नेपाल की इस आपदा का असर भारत के सीमावर्ती इलाकों तक पहुंचने की आशंका को देखते हुए बिहार और उत्तर प्रदेश को हाई अलर्ट पर रखा गया है।केंद्रीय जल आयोग के अनुसार त्रिशूली का अतिरिक्त पानी आगे चलकर भारत में गंडक नदी के प्रवाह को प्रभावित कर सकता है। गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से स्थिति पर चर्चा की है। सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रशासन, राहत दल और NDRF को सतर्क रखा गया है।
बिहार के निचले और संवेदनशील इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की गई है। वहीं उत्तर प्रदेश के महराजगंज और कुशीनगर समेत नेपाल से जुड़े क्षेत्रों में नदियों के जलस्तर की निगरानी बढ़ा दी गई है। हालांकि अधिकारियों के अनुसार फिलहाल उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर बाढ़ का तत्काल खतरा नहीं है।
विशेषज्ञ इस आपदा के पीछे हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर और बर्फ-चट्टानों के अस्थिर होने को प्रमुख कारण मान रहे हैं। यह घटना एक बार फिर नेपाल के साथ-साथ बिहार और उत्तर प्रदेश के लिए मजबूत सीमा-पार बाढ़ चेतावनी तंत्र की जरूरत को रेखांकित करती है।


