केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 ने देश के बड़े शहरों के प्रदूषण नियंत्रण प्रयासों की दिलचस्प तस्वीर पेश की है। 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में लखनऊ 198 अंकों के साथ पहले स्थान पर रहा। इंदौर 197 अंकों के साथ दूसरे और जबलपुर 195 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर है। भोपाल और आगरा 192 अंकों के साथ संयुक्त चौथे तथा सूरत 191 अंकों के साथ पांचवें स्थान पर रहे।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर ने 189 अंक हासिल कर छठा स्थान प्राप्त किया। खास बात यह है कि रायपुर ने कई बड़े महानगरों को पीछे छोड़ा। पटना 178 अंकों के साथ 16वें, दिल्ली 172 अंकों के साथ 21वें और मुंबई 160.8 अंकों के साथ 28वें स्थान पर रही। वहीं चेन्नई 147.7 अंकों के साथ 35वें और कोलकाता 142.2 अंकों के साथ 38वें स्थान पर रहा। दुर्ग-भिलाई ने 175.3 अंकों के साथ 17वां स्थान हासिल किया।
तीन से 10 लाख आबादी वाले शहरों में ओडिशा का राउरकेला 198.5 अंकों के साथ शीर्ष पर रहा। फिरोजाबाद और गुंटूर 195 अंकों के साथ संयुक्त दूसरे स्थान पर रहे, जबकि छत्तीसगढ़ का कोरबा 186.5 अंकों के साथ 10वें स्थान पर है।
इन नतीजों की सबसे दिलचस्प बात यह है कि शहर का आकार या आर्थिक ताकत बेहतर प्रदर्शन की गारंटी नहीं है। मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे बड़े महानगरों की तुलना में लखनऊ, रायपुर और जबलपुर का आगे रहना बताता है कि सड़क की धूल, कचरा प्रबंधन, वाहनों व औद्योगिक उत्सर्जन और जनभागीदारी पर लगातार काम निर्णायक हो सकता है। सर्वेक्षण इन्हीं जैसे प्रदूषण-नियंत्रण उपायों और उनके क्रियान्वयन को परखता है।
रैंकिंग अच्छी शुरुआत का संकेत जरूर है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि सुधार नागरिकों को रोजमर्रा की हवा में कितना महसूस होता है। शहरों के लिए अगला लक्ष्य रैंक हासिल करना नहीं, बल्कि स्वच्छ हवा को स्थायी शहरी व्यवस्था में बदलना होना चाहिए।


