वियतनाम के हनोई में आयोजित 19वीं इंटरनेशनल ओलंपियाड ऑन एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स (IOAA) में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चार गोल्ड और एक सिल्वर मेडल अपने नाम किया है। 25 सितंबर से 5 अक्टूबर तक आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत के सभी पांच प्रतिभागियों ने पदक जीते।
हैदराबाद के प्रांजल दीक्षित, दिल्ली के सुमंत गुप्ता, गुरुग्राम के अक्षत श्रीवास्तव और फरीदाबाद के अर्णव सहरावत ने गोल्ड मेडल जीते। वहीं वडोदरा के हर्षिल अमितकुमार पटेल ने सिल्वर मेडल हासिल किया। इस प्रदर्शन के साथ भारत मेडल तालिका में मेजबान देश वियतनाम के साथ संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर रहा। ईरान और दक्षिण कोरिया पांच-पांच गोल्ड मेडल के साथ संयुक्त रूप से शीर्ष पर रहे।
इस साल की IOAA प्रतियोगिता अब तक की सबसे बड़ी प्रतियोगिता रही, जिसमें 64 देशों के 307 छात्रों ने हिस्सा लिया। ऐसे में भारतीय टीम का प्रत्येक सदस्य पदक जीतने में सफल रहा, जो देश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
भारतीय दल के साथ टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR), मुंबई की प्रोफेसर भास्वती मुखर्जीया और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स, बेंगलुरु के प्रोफेसर संवेड़ कोलेकर मौजूद रहे। वहीं होमी भाभा सेंटर फॉर साइंस एजुकेशन (HBCSE)-TIFR के प्रोफेसर अनिकेत सुले भी प्रतियोगिता में मौजूद रहे। प्रोफेसर अनिकेत सुले वर्तमान में IOAA के अध्यक्ष हैं।
IOAA में छात्रों की केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं, बल्कि उनकी व्यावहारिक समझ और वैज्ञानिक विश्लेषण क्षमता का भी परीक्षण किया गया। प्रतियोगिता में 50 प्रतिशत मूल्यांकन थ्योरी पर आधारित था, जबकि ऑब्जर्वेशन और डेटा एनालिसिस को 25-25 प्रतिशत वेटेज दिया गया। छात्रों को खगोलीय अवलोकनों और वैज्ञानिक आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए अपनी समझ को व्यावहारिक रूप से लागू करना पड़ा।
हनोई में भारत की यह सफलता इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय विज्ञान ओलंपियाड में देश के मजबूत प्रदर्शन को भी दर्शाती है। HBCSE के अनुसार, गणित, भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और खगोल विज्ञान की अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने वाले सभी भारतीय प्रतिभागियों ने गोल्ड या सिल्वर मेडल जीता है। इन पांच विषयों में कुल 24 भारतीय छात्रों ने हिस्सा लिया, जिनमें 16 ने गोल्ड और आठ ने सिल्वर मेडल हासिल किया।
खगोल विज्ञान ओलंपियाड में भारत का रिकॉर्ड भी लगातार मजबूत रहा है। भारत ने वर्ष 1999 से Astronomy Olympiads में हिस्सा लेना शुरू किया था। तब से अब तक 49 प्रतिशत भारतीय प्रतिभागियों ने गोल्ड, 35 प्रतिशत ने सिल्वर और 13 प्रतिशत ने ब्रॉन्ज मेडल जीता है। पिछले पांच वर्षों में भारत के प्रत्येक प्रतिभागी ने गोल्ड या सिल्वर मेडल हासिल किया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी प्रतियोगिताओं में भारत की मजबूत स्थिति बरकरार है।


