भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी मद्रास) ने न्यूरोसाइंस अनुसंधान के क्षेत्र में एक बड़ी पहल करते हुए मानव मस्तिष्क के 100 से अधिक त्रि-आयामी (3डी) एटलस तैयार करने का मिशन शुरू किया है। इन एटलस को कोशिकीय स्तर की सूक्ष्मता के साथ मानव जीवन के विभिन्न चरणों को ध्यान में रखकर विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही संस्थान ने दुनिया का पहला मानव इस्केमिक स्ट्रोक एटलस ‘सी-स्ट्रोक’ (C-STROKE) भी जारी किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 अक्टूबर को आईआईटी मद्रास के दौरे के दौरान सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर (एसजीबीसी) को राष्ट्र को समर्पित किया। इस अवसर पर उन्होंने केंद्र के मस्तिष्क अनुसंधान मिशन और सी-स्ट्रोक एटलस के शुभारंभ को भी देखा। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह केंद्र स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में अत्याधुनिक अनुसंधान और नवाचार को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
आईआईटी मद्रास के अनुसार, सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर उन्नत मस्तिष्क इमेजिंग, कंप्यूटिंग और विभिन्न वैज्ञानिक एवं तकनीकी क्षेत्रों की विशेषज्ञता को एक मंच पर लाता है। इसका उद्देश्य मस्तिष्क की संरचना और तंत्रिका संबंधी बीमारियों को बेहतर ढंग से समझने के लिए उच्च-रिजॉल्यूशन वाले मस्तिष्क मानचित्र तैयार करना और उन्हें दुनिया भर के शोधकर्ताओं तथा चिकित्सा विशेषज्ञों के लिए उपलब्ध कराना है।
सी-स्ट्रोक एटलस को इस्केमिक स्ट्रोक के अध्ययन के लिए एक ओपन-एक्सेस वैश्विक संसाधन के रूप में विकसित किया गया है। यह एटलस क्लिनिकल मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) स्कैन को सूक्ष्म स्तर पर पूरे मस्तिष्क की इमेजिंग से जोड़ता है, जिससे स्ट्रोक के कारण मस्तिष्क में होने वाले बदलावों को कोशिकीय स्तर पर समझने में मदद मिलेगी।
इसमें 1,000 से अधिक चिह्नित मस्तिष्क खंड शामिल हैं। ये न्यूरॉन के स्वास्थ्य, न्यूरोइन्फ्लेमेशन, रक्त-मस्तिष्क अवरोध में व्यवधान, ऑक्सीजन की कमी और तंत्रिका तंतुओं को होने वाली क्षति जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी देते हैं।
आईआईटी मद्रास के पूर्व छात्र वी. प्रेम वत्सा के सहयोग से विकसित यह एटलस दुनिया भर के शोधकर्ताओं और चिकित्सकों को मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों का अध्ययन करने तथा संभावित उपचारों के नए लक्ष्य तलाशने में मदद करेगा।


